Ranchi: झारखंड में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में लापरवाही या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक के मामलों में सरकार ने कई बार बड़े प्रशासनिक फैसले लिए हैं। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में ऐसी घटनाएं सामने आईं, जब सिर्फ निचले स्तर के कर्मियों ही नहीं, बल्कि SSP, SP और DC जैसे वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई। इन फैसलों ने यह संदेश दिया कि कानून-व्यवस्था के मामलों में जवाबदेही हर स्तर पर तय की जाएगी।
करणी सेना नेता हत्याकांड (2026)
जमशेदपुर में करणी सेना नेता हिमांशु सिंह की हत्या के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जमशेदपुर के SSP पीयूष पांडेय और सरायकेला की SP निधि द्विवेदी को पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया। सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता को कार्रवाई का आधार बताया।
पुष्पा महतो हत्याकांड (2026)
बोकारो की युवती पुष्पा कुमारी की हत्या के मामले में शुरुआती जांच में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई। पहले थाना प्रभारी समेत 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया, फिर बोकारो SP को हटाया गया। इसके अलावा संबंधित IG और DIG का भी तबादला किया गया।
खरसावां सुरक्षा चूक (2017)
खरसावां शहीद पार्क में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की सुरक्षा में हुई चूक के बाद जांच में लापरवाही की पुष्टि हुई। इसके बाद तत्कालीन DC के. श्रीनिवासन और SP संजीव कुमार को पद से हटा दिया गया। संजीव कुमार ने घटना से सिर्फ 26 दिन पहले ही जिले के SP का कार्यभार संभाला था।
राजनगर मॉब लिंचिंग (2017)
सरायकेला के राजनगर में मॉब लिंचिंग की घटना के दौरान समय पर कार्रवाई नहीं करने, फोन नहीं उठाने और देर से घटनास्थल पहुंचने के आरोप में तत्कालीन DC रमेश सी. घोलप और SP राकेश बंसल को निलंबित कर मुख्यालय भेज दिया गया।
झारखंड के इन चर्चित मामलों से साफ है कि जब भी कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे, सरकार ने वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कड़ी कार्रवाई करने में संकोच नहीं किया।