रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं परीक्षा को लेकर उठे विवाद और कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंचती नजर आ रही है। गुरुवार को अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की टीम ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांग्ते के कांके रोड स्थित आवास पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। जांच टीम ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की।
पहले भी कई ठिकानों पर हुई थी कार्रवाई
इससे पहले 21 जुलाई को CID ने रांची पुलिस के साथ मिलकर बड़े स्तर पर छापेमारी अभियान चलाया था। इस दौरान JPSC कार्यालय, परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) के कार्यालय समेत कई स्थानों पर एक साथ रेड की गई थी। जांच टीम ने वहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामग्री जब्त की थी।
पांच लोगों की गिरफ्तारी से बढ़ी जांच की रफ्तार
जांच में सामने आए प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर CID ने 22 जुलाई को कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया। इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, मो. उस्मान, मो. एबाद और अभय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
परीक्षा प्रक्रिया की परत-दर-परत जांच
CID की जांच फिलहाल परीक्षा आयोजन, डेटा प्रोसेसिंग, मेरिट लिस्ट तैयार करने और परिणाम प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया पर केंद्रित है। पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के आवास पर की गई छापेमारी को इसी कड़ी की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि कथित अनियमितताओं के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और परीक्षा प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ियां हुईं।
बढ़ सकती है कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आने वाले दिनों में और भी लोगों से पूछताछ या कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। JPSC विवाद को लेकर पूरे राज्य की नजर अब CID की जांच पर टिकी हुई है।