रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कोई यात्री बस चालक के कहने या निर्देश पर बस की छत पर यात्रा कर रहा हो, तो केवल मोटर वाहन अधिनियम की धारा 123(2) के उल्लंघन के आधार पर उसे मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनाक की पीठ ने वर्ष 2010 में गिरिडीह में हुई सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले में मृतक मालचंद मुर्मू के आश्रितों को राहत देते हुए मुआवजे की राशि 6,41,200 रुपये से बढ़ाकर 11,13,360 रुपये कर दी। साथ ही बीमा कंपनी को पहले मुआवजा भुगतान करने और बाद में वाहन मालिक से राशि वसूलने के आदेश को बरकरार रखा।
मालचंद मुर्मू बस की छत पर सफर कर रहे थे, तभी कथित रूप से चालक की लापरवाही के कारण दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित सिद्धांतों और आश्रितों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया। इसे मोटर वाहन दुर्घटना मामलों में पीड़ित परिवारों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।