रांची: के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध ने अब बड़ा रूप लेना शुरू कर दिया है। शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण पारंपरिक तीर-धनुष के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे और यदि जबरन भूमि अधिग्रहण की कोशिश हुई तो एक बार फिर ‘उलगुलान’ होगा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी पहचान, संस्कृति और आजीविका का आधार है। उनका आरोप है कि स्थानीय लोगों की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जो स्वीकार्य नहीं है।
ग्रामीणों ने कहा कि विकास के नाम पर आदिवासियों और मूलवासियों को उनकी जमीन से बेदखल नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से रिम्स-2 परियोजना के लिए वैकल्पिक भूमि की तलाश करने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उनकी आवाज को अनसुना किया गया तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने इसे सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संघर्ष बताया। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही सरकार से संवाद के माध्यम से इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील भी की।