रांची: झारखंड में ग्रामीण सड़कों, पुलों और अन्य विकास योजनाओं को वर्षों तक अधूरा छोड़ने वाले ठेकेदारों और एजेंसियों पर अब सरकार का शिकंजा कसने जा रहा है। ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री Deepika Pandey Singh ने साफ कहा है कि तय समय सीमा में काम पूरा नहीं करने वाले संवेदकों को राज्य में आगे कोई नया टेंडर नहीं मिलेगा। ऐसे डिफॉल्टर ठेकेदारों को डिबार करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
रांची स्थित झारखंड सिविल सर्विस ऑफिसर्स इंस्टीच्यूट में आयोजित ग्रामीण विकास एवं ग्रामीण कार्य विभाग की लंबी समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को कई कड़े निर्देश दिए। जिलावार समीक्षा में सामने आया कि कई एजेंसियों ने वर्षों से सड़क और पुल निर्माण कार्य अधूरा छोड़ रखा है, बावजूद इसके उन्हें नई योजनाएं भी आवंटित कर दी गईं। इस पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि काम लटकाकर बाद में रेट रिवीजन का फायदा लेने की कोशिश अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रेट रिवीजन मामलों की होगी जांच
मंत्री ने निर्देश दिया कि हाल के महीनों में जिन परियोजनाओं में रेट रिवीजन हुआ है, उनकी गहन जांच की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त एसओपी तैयार करने को कहा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जानबूझकर काम में देरी करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
विधायकों की शिकायतों पर होगी फील्ड जांच
बैठक में मंत्री ने गुणवत्ता से समझौता नहीं करने की चेतावनी देते हुए कहा कि विधायकों द्वारा भेजी गई शिकायतों पर केवल कागजी कार्रवाई न हो, बल्कि मौके पर जांच कर तय समय के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आगामी मानसून को देखते हुए सभी जर्जर पुलों की सूची तैयार कर तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश भी दिए गए।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर
ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के मुद्दे पर मंत्री ने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की कार्यशैली पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि ‘दीदियों’ को सिर्फ छोटी किराना दुकानों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें बड़े स्तर की महिला उद्यमिता से जोड़ा जाए।
बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश
6 जिलों में बढ़ती मांग को देखते हुए नए पलाश मार्ट खोलने के लिए जमीन चिन्हित करने का निर्देश।
अबुआ आवास योजना के लाभार्थियों को अंतिम किस्त जल्द जारी करने पर जोर।
राज्य में स्वयं सहायता समूहों की संख्या 3.19 लाख पहुंचने की जानकारी।
मनरेगा समीक्षा में ‘वी बी ग्राम जी योजना’ से राज्य पर 1700 करोड़ रुपये अतिरिक्त भार आने की बात सामने आई।
1 से 1.5 साल तक काम लटकाने वाले ठेकेदारों की सूची जिला स्तर से मुख्यालय भेजने का निर्देश।