रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने आगामी जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की जातिगत पहचान को स्पष्ट रूप से दर्ज करने और इसके लिए अलग कोड निर्धारित करने की मांग उठाई है। शनिवार को रांची स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने जातिगत जनगणना को सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की उचित हिस्सेदारी से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से स्पष्ट व्यवस्था करने की मांग की।
प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि जनगणना का पहला चरण पूरा हो चुका है और अब व्यक्तियों की गणना का चरण शुरू होना है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि OBC की जातिगत पहचान और उनकी वास्तविक संख्या का वैज्ञानिक एवं प्रमाणिक तरीके से आंकलन हो।
उन्होंने कहा कि झारखंड में पिछड़े वर्गों की बड़ी आबादी होने के बावजूद उन्हें उनकी जनसंख्या के अनुपात में सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं मिल पा रही है। मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर OBC के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन झारखंड के सात जिलों में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण शून्य होना गंभीर चिंता का विषय है।
जनगणना फॉर्म में OBC के लिए अलग कोड की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की कि जिस तरह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए स्पष्ट पहचान और कोड की व्यवस्था है, उसी तरह OBC के लिए भी जनगणना प्रपत्र में अलग कोड उपलब्ध कराया जाए। साथ ही राज्यों में मान्य पिछड़ा वर्ग की जातियों को सूचीबद्ध करते हुए उनकी पहचान दर्ज की जाए, ताकि देश और राज्य में OBC की वास्तविक आबादी का प्रमाणिक आंकड़ा सामने आ सके।
उन्होंने बताया कि इसी मांग को लेकर 16 सितंबर को OBC मोर्चा बापू वाटिका से राजभवन तक मार्च करेगा और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगा।
2011 के जातिगत आंकड़ों का भी उठाया मुद्दा
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि वर्तमान जनगणना व्यवस्था में जाति दर्ज करने के लिए पूर्व निर्धारित ड्रॉपडाउन सूची या OBC के लिए अलग विशेष कॉलम नहीं होने की बात सामने आई है। इसके बजाय व्यक्ति द्वारा स्वयं घोषित जाति दर्ज करने के लिए खुला कॉलम रखा गया है। इससे जातियों की पहचान और आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने 2011 की सामाजिक-आर्थिक एवं जातिगत जनगणना (SECC) का हवाला देते हुए कहा कि उस समय जुटाए गए जातिगत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए थे। बाद में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामों में इन आंकड़ों में तकनीकी खामियों और विसंगतियों का उल्लेख किया था।
प्रदीप यादव ने कहा कि यदि आगामी जनगणना में OBC की पहचान दर्ज करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में भी आंकड़ों की शुद्धता को लेकर इसी तरह की समस्याएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आंकड़ा सामने आए बिना आरक्षण, कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों को प्रभावी तरीके से तैयार करना मुश्किल होगा।
26 सितंबर से कांग्रेस का अलग आंदोलन
केशव महतो कमलेश ने बताया कि MMDR कानून, खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दों और चंदा चोरी के विरोध में कांग्रेस 26 सितंबर को शहीद चौक से राजभवन तक मार्च करेगी। इसके बाद 5 से 10 अक्टूबर तक सभी प्रखंड मुख्यालयों में विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
वहीं, नवनियुक्त OBC प्रदेश अध्यक्ष निशांत जायसवाल ने कहा कि पिछड़े वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक और आर्थिक हिस्सेदारी दिलाना सामाजिक न्याय के लिए जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार से आगामी जनगणना में OBC की जातिगत पहचान और अलग कोड की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रेस वार्ता में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सह मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुजनी, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रदेश संयोजक डॉ. तौसीफ, सोशल मीडिया अध्यक्ष गजेंद्र सिंह, प्रदेश प्रवक्ता उज्जवल प्रकाश तिवारी और प्रदेश महासचिव राकेश किरण महतो समेत अन्य नेता मौजूद रहे।