Ranchi: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच CBI जांच की मांग को लेकर सियासत और तेज हो गई है। आंदोलनरत छात्रों की ओर से लगातार केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की जा रही है। वहीं, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने छात्रों से राज्य की जांच एजेंसियों पर भरोसा रखने की अपील की है। राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि झारखंड में CID और स्पेशल ब्रांच जैसी सक्षम जांच एजेंसियां मौजूद हैं। यदि हर मामले की जांच CBI से ही करानी होगी, तो फिर राज्य की अपनी जांच एजेंसियों की जरूरत पर सवाल खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि राज्य की एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से जांच पूरी करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
CBI जांच को लेकर छात्रों का रुख साफ
दूसरी ओर आंदोलन कर रहे छात्र संगठन CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है। उनका तर्क है कि जब तक CBI जांच की स्पष्ट घोषणा नहीं होती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। सरकार की ओर से JSSC-CGL समेत TDPL के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा के लिए कमेटी गठित करने का फैसला लिया जा चुका है। इसके बावजूद छात्र अपनी मुख्य मांग पर कायम हैं।
भाजपा पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप
वित्त मंत्री ने भाजपा पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे के जरिए सरकार और कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रहा है। मंत्री के मुताबिक, यदि भाजपा वास्तव में छात्रों के मुद्दे पर चर्चा करना चाहती थी, तो विधानसभा में इस विषय पर अपनी बात रख सकती थी।
10 अगस्त को चर्चा से निकल सकता था रास्ता
राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा के 10 अगस्त के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में छात्र आंदोलन पर चर्चा के लिए पहले दो घंटे का समय निर्धारित किया गया था। विपक्ष के आग्रह पर इसमें एक घंटे का अतिरिक्त समय भी दिया गया था। मंत्री का दावा है कि इसके बावजूद सदन में चर्चा करने के बजाय मुख्यमंत्री आवास के घेराव का रास्ता अपनाया गया। उनका कहना है कि यदि विधानसभा में चर्चा होती तो उसी दिन इस मामले पर समाधान की दिशा में ठोस फैसला लिया जा सकता था।
सरकार के फैसले के बाद भी आंदोलन जारी
सरकार ने सोमवार को JSSC-CGL समेत TDPL द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है। साथ ही 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं की जांच कराने की बात कही गई है। भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए IAS अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। सरकार की ओर से छात्रों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की गई है, लेकिन आंदोलनकारी छात्र CBI जांच की घोषणा होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में भर्ती परीक्षाओं का विवाद अब जांच एजेंसी के चयन को लेकर सरकार और छात्रों के बीच आमने-सामने की स्थिति में पहुंच गया है।