रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सहायक वन संरक्षक (ACF) और वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) भर्ती परीक्षाओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले की जांच कर रही CID ने अदालत में एक शिकायत की प्रति प्रस्तुत की है, जिसमें OMR शीट में कथित हेरफेर, डिजिटल डेटा से छेड़छाड़ और अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की मांग किए जाने का दावा किया गया है। शिकायत जनवरी 2026 में कर्नाटका थर्ड क्रॉस रोड निवासी सौरभ बर्मन ने JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते को दी थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इतनी गंभीर जानकारी मिलने के बावजूद आयोग स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
सैकड़ों OMR में गड़बड़ी का आरोप
शिकायत में परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी TDPL से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि ACF परीक्षा की 150 से अधिक और FRO परीक्षा की 350 से ज्यादा OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित तौर पर अनधिकृत बदलाव किए गए। इसके अलावा अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के नाम पर शुरुआती स्तर पर करीब 5 लाख रुपये और अंतिम चयन के लिए करीब 25 लाख रुपये तक की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी दावा है कि 14वीं JPSC परीक्षा के लिए कुछ अभ्यर्थियों से अग्रिम रकम लेने की तैयारी थी।
प्रमाणपत्र और खाली दस्तावेज लेने का दावा
शिकायत के अनुसार, कथित नेटवर्क ने अभ्यर्थियों पर दबाव बनाए रखने के लिए उनके मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, OMR की प्रतियां, रद्द चेक, ब्लैंक स्टांप पेपर और हस्ताक्षर किए हुए खाली A-4 कागजात तक अपने पास रखे।
परीक्षा एजेंसी से जुड़े व्यक्ति के खुद परीक्षा देने पर सवाल
मामले में अभय कुमार तिवारी की भूमिका भी जांच के घेरे में बताई गई है। शिकायत के मुताबिक, वह TDPL से जुड़ा था और उसने खुद ACF तथा FRO प्रारंभिक परीक्षा में अभ्यर्थी के तौर पर हिस्सा लिया और चयनित भी हुआ। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि अभय तिवारी का नाम JSSC-CGL पेपर लीक मामले में दर्ज नामकुम थाना कांड संख्या 45/2024 से जुड़ा है। यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो परीक्षा संचालन से जुड़े व्यक्ति का उसी परीक्षा में अभ्यर्थी के रूप में शामिल होना गंभीर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट का मामला बन सकता है।
TDPL के पुराने रिकॉर्ड पर भी उठे सवाल
शिकायत में परीक्षा संचालन एजेंसी TDPL के पिछले रिकॉर्ड का भी हवाला दिया गया है। आरोप है कि जुलाई 2023 में फर्जी दस्तावेज जमा करने और अनुचित दरें कोट करने के मामले में एजेंसी को चार साल के लिए डिबार किया गया था। इसके बावजूद संवेदनशील JPSC परीक्षाओं की जिम्मेदारी उसे दिए जाने पर आयोग की चयन और जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए गए हैं। अब CID की जांच में इन आरोपों की सच्चाई, OMR में कथित बदलाव, डिजिटल डेटा से छेड़छाड़ और पैसों के लेन-देन से जुड़े दावों की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।