रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में अध्यक्ष का पद लंबे समय से रिक्त रहने पर गंभीर चिंता जताई है। गुरुवार को एक स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि किसी भी संवैधानिक संस्था को बिना स्थायी नेतृत्व के लंबे समय तक संचालित नहीं किया जाना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ वन विभाग में रिक्त पदों पर नियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान JPSC की ओर से पेश अधिवक्ता संजोय पिपरवाल ने अदालत को बताया कि विभाग में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि फॉरेस्ट रेंजर और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों पूरी हो चुकी हैं तथा अब चयन प्रक्रिया को जल्द पूरा कर नियुक्तियां करने की दिशा में कार्रवाई जारी है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि JPSC जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक आयोग में अध्यक्ष का पद रिक्त रहना उचित नहीं है। अदालत ने इस पद पर जल्द नियुक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद खंडपीठ ने अगली सुनवाई की तारीख 20 अगस्त निर्धारित की है। अदालत की यह टिप्पणी राज्य की भर्ती प्रक्रिया और आयोग के प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से अहम मानी जा रही है।