रांची: झारखंड में जेल व्यवस्था को और अधिक सुधारात्मक बनाने की तैयारी है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की तरह अब जेल में बेहतर आचरण करने वाले अन्य बंदियों को भी ओपन और सेमी-ओपन जेल की सुविधा मिल सकती है। पात्र बंदियों को परिवार के साथ रहने के अलावा दिन में जेल से बाहर जाकर काम करने और अपनी आजीविका कमाने का अवसर दिया जाएगा।
सजा के साथ सुधार पर जोर
जेल विभाग का उद्देश्य बंदियों को केवल सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में दोबारा शामिल होने के लिए तैयार करना है। जेल में अच्छा व्यवहार करने और निर्धारित मानकों पर खरा उतरने वाले बंदियों को नियंत्रित व्यवस्था के तहत बाहर काम करने की अनुमति दी जा सकती है। ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट में पात्र बंदी अपने परिवार के साथ भी रह सकेंगे। जेल आईजी सुदर्शन मंडल के अनुसार, इस व्यवस्था का मकसद बंदियों को जिम्मेदार और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि जेल से बाहर आने के बाद वे सामान्य जीवन बेहतर तरीके से शुरू कर सकें।
चार केंद्रीय जेलों में शुरू होगी नई व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद झारखंड में भी ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट की व्यवस्था को विस्तार देने की तैयारी है। राज्य सरकार ने चार केंद्रीय जेलों में ओपन या सेमी-ओपन बैरक शुरू करने का प्रस्ताव भेजा है। यहां पात्र बंदियों के लिए अलग व्यवस्था विकसित की जाएगी।
सुबह काम पर जाएंगे, शाम को लौटेंगे जेल
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत योग्य बंदियों को दिन में जेल से बाहर जाकर नौकरी या अन्य रोजगार करने की अनुमति दी जा सकती है। वे सुबह करीब 6 बजे बाहर निकलकर शाम 6 से 7 बजे के बीच वापस संस्थान में लौटेंगे। इस दौरान वे कमाई के साथ-साथ नए कौशल भी सीख सकेंगे। गौरतलब है कि देश में ओपन जेल की अवधारणा करीब पांच दशक पुरानी है। राजस्थान के सांगानेर में देश का पहला ओपन जेल शुरू किया गया था। झारखंड में भी इसी सोच के तहत पहले नक्सल प्रिजन बनाया गया था, जिसे वर्ष 2018 में सरेंडर नक्सल जेल में बदला गया।