Ranchi: झारखंड में आपराधिक गिरोहों का आतंक अब सिर्फ बड़े ठेकेदारों और उद्योगपतियों तक सीमित नहीं रह गया है। रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों और जिलों से आए मजदूर, ड्राइवर, गार्ड और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले कर्मचारी भी अपराधियों के निशाने पर हैं। लेवी और रंगदारी की मांग को लेकर लगातार हो रही फायरिंग ने इन कामगारों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।
पुलिस की ओर से अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। कई मामलों में पुलिस मुठभेड़ के दौरान अपराधियों को गोली भी लगी है, लेकिन इसके बावजूद रंगदारी और लेवी का खेल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। पुराने कुख्यात अपराधियों के कमजोर पड़ने के बाद अब नए गिरोह और नए चेहरे आपराधिक नेटवर्क को आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं। राहुल दुबे और प्रिंस खान जैसे नाम इन घटनाओं में सामने आ रहे हैं।
टंडवा में कंपनी कार्यालय पर दिनदहाड़े फायरिंग
23 अगस्त को चतरा के टंडवा थाना क्षेत्र के ग्राम उड़सू स्थित चंद्रगुप्त कोल परियोजना में काम कर रही सुशी इंफ्रा कंपनी के कार्यालय को अपराधियों ने निशाना बनाया। दो बाइक पर सवार चार नकाबपोश अपराधी करीब 2:25 बजे कार्यालय पहुंचे और ताबड़तोड़ हवाई फायरिंग कर दी।
फायरिंग की चपेट में आने से वहां तैनात गार्ड घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई। शुरुआती जांच में इस वारदात के पीछे राहुल दुबे गिरोह का नाम सामने आया है।
पलामू में निर्माण स्थल पर मजदूरों को मारी गोली
21 अगस्त को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के रजडेरवा में नेशनल हाईवे निर्माण स्थल पर फायरिंग की घटना हुई। इस दौरान दो मजदूर गोली लगने से घायल हो गए। घायल अजय हांसदा और संजय हांसदा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया के रहने वाले बताए गए हैं।
पुलिस ने घटनास्थल से चार खोखे बरामद किए। साथ ही राहुल दुबे गिरोह से जुड़ा एक पर्चा भी मिलने की बात सामने आई है। इस घटना ने निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हजारीबाग में हाइवा के उपचालक को बनाया निशाना
25 जुलाई को हजारीबाग के गिद्दी परियोजना क्षेत्र में संचालित एक निजी क्रशर में हथियारबंद अपराधियों ने धावा बोल दिया था। अपराधियों ने कोयला लोडिंग के लिए खड़े हाइवा के उपचालक करण कुमार के दोनों पैरों में गोली मार दी।
वारदात के बाद अपराधी राहुल दुबे गिरोह के नाम से धमकी भरे पर्चे छोड़कर फरार हो गए थे। इस घटना ने साफ कर दिया कि अपराधियों के निशाने पर अब परिवहन और खनन परियोजनाओं से जुड़े सामान्य कर्मचारी भी हैं।
बड़कागांव में हाइवा पर आठ राउंड फायरिंग
25 जुलाई को ही हजारीबाग के बड़कागांव में कोल खनन परियोजना में लगे दो हाइवा वाहनों को अपराधियों ने निशाना बनाया था। तीन अपराधियों ने दोनों वाहनों पर करीब आठ राउंड फायरिंग की और मौके से फरार हो गए।
इस घटना की जिम्मेदारी प्रिंस खान की ओर से लिए जाने की बात सामने आई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से कोयला, सड़क और निर्माण परियोजनाओं में काम करने वाले लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
पुराने गैंग कमजोर पड़े, तो नए चेहरे सक्रिय
झारखंड में कभी अमन साहू, सुजीत सिन्हा और अमन सिंह जैसे कुख्यात अपराधियों के नाम से रंगदारी का नेटवर्क चर्चा में रहा। इनके खिलाफ कार्रवाई और गिरोहों के कमजोर पड़ने के बाद उम्मीद थी कि लेवी वसूली का सिलसिला थमेगा। हालांकि, हाल की घटनाएं संकेत दे रही हैं कि आपराधिक नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब अलग-अलग इलाकों में नए गिरोह सक्रिय होकर निर्माण, खनन और परिवहन से जुड़े कारोबारियों को निशाना बना रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन वारदातों में गोली का शिकार अक्सर वही मजदूर या कर्मचारी हो रहे हैं, जिनका अपराध की दुनिया से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे में पुलिस के सामने अपराधियों पर कार्रवाई के साथ-साथ निर्माण और औद्योगिक परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों, ड्राइवरों और सुरक्षा कर्मियों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने की भी बड़ी चुनौती है।