गुरपा-गझंडी रेलखंड की सुरंगों में बड़ा बदलाव, अब BOBR वैगनों से होगी तेज कोयला ढुलाई

Mahak Kumari
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Hazaribagh: पूर्व मध्य रेल के गुरपा-गझंडी घाट रेलखंड पर लंबे समय से बनी ऊंचाई की समस्या अब दूर हो गई है। इस ऐतिहासिक रेलमार्ग की तीन सुरंगों में तकनीकी बदलाव और ऊंचाई बढ़ाने का काम पूरा होने के बाद आधुनिक BOBR वैगनों से कोयले की नियमित ढुलाई शुरू कर दी गई है। रेलवे के इस कदम से झारखंड के हजारीबाग क्षेत्र स्थित NTPC की बड़कागांव और केरेडारी कोयला खदानों से बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने की प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है। करीब 120 वर्ष पुराने इस रेलखंड की तीन सुरंगों की ऊंचाई कम होने के कारण यहां BOBR वैगनों का परिचालन संभव नहीं था। रेलवे ने सुरंगों के पुनर्रचना और आवश्यक संरचनात्मक बदलाव की योजना तैयार कर जनवरी 2026 में काम शुरू किया था, जिसे जून में पूरा कर लिया गया।

काम पूरा होने के बाद पहले खाली और फिर कोयले से लदे BOBR रेक को अप और डाउन दोनों रेल लाइनों पर चलाकर परीक्षण किया गया। सफल ट्रायल के बाद अब इस मार्ग से नियमित मालगाड़ियों का परिचालन शुरू हो गया है।

धनबाद से बाढ़ तक करीब 250 किमी कम होगी दूरी

गुरपा-गझंडी मार्ग के इस्तेमाल से धनबाद से बाढ़ स्थित NTPC बिजली संयंत्र तक जाने वाले कोयला रेक को पहले के मुकाबले करीब 250 किलोमीटर कम दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे मालगाड़ियों के सफर में लगभग पांच घंटे तक की बचत होने का अनुमान है। अब तक धनबाद मंडल से BOBR रेक प्रधानखांटा-आसनसोल-झाझा रेलमार्ग के रास्ते भेजे जाते थे। नए मार्ग के शुरू होने से बाढ़, बरौनी और सलाकाटी स्थित NTPC बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाना अधिक सुगम हो सकेगा।

खाली रेक भी इसी रूट से लौटेंगे

नई व्यवस्था में केवल लोडेड रेक को ही फायदा नहीं मिलेगा। बिजली संयंत्रों में कोयला खाली करने के बाद BOBR वैगन इसी मार्ग से वापस धनबाद मंडल पहुंच सकेंगे। इससे रेक के टर्नअराउंड टाइम में कमी आएगी और कम समय में अधिक रेक उपलब्ध होने की संभावना है। इसका सीधा असर धनबाद क्षेत्र में कोयला लोडिंग की क्षमता पर पड़ सकता है।

IIT-ISM ने दिया तकनीकी सहयोग

रेलवे के मुताबिक परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया गया। पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह की पहल पर IIT-ISM धनबाद के तकनीकी सहयोग से सुरंगों की संरचना में जरूरी बदलाव किए गए। ऐतिहासिक गुरपा-गझंडी रेलखंड पर आधुनिक मालवाहक वैगनों का परिचालन शुरू होना रेलवे की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में माना जा रहा है।

1906-07 में शुरू हुई थी ग्रैंड कार्ड लाइन

गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन ऐतिहासिक ग्रैंड कार्ड रेल लाइन का हिस्सा है। इस रेलमार्ग की शुरुआत वर्ष 1906-07 में लॉर्ड मिंटो के कार्यकाल के दौरान हुई थी। एक सदी से अधिक पुराने इस रेलखंड को आधुनिक मालवाहक वैगनों के अनुकूल बनाने से कोयला परिवहन के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता और बढ़ गई है।

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