Ranchi: बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) खड़गपुर ने अनुसंधान, अकादमिक उत्कृष्टता और संस्थागत क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पांच वर्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी संयुक्त शोध, छात्र-फैकल्टी आदान-प्रदान, प्रयोगशालाओं के साझा उपयोग और नवाचार आधारित विकास को नई गति देगी।
एमओयू पर बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना और आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दोनों संस्थानों के वरिष्ठ शिक्षाविद और शोधकर्ता भी मौजूद रहे।
समझौते के तहत मास्टर एवं पीएचडी छात्रों का संयुक्त मार्गदर्शन, अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट स्तर पर शोध सहयोग, छात्र एवं फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रम, समर और विंटर इंटर्नशिप तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फंडिंग एजेंसियों को संयुक्त शोध प्रस्ताव भेजने जैसी पहलें शामिल हैं। इसके अलावा रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर का साझा उपयोग, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सेमिनार, कार्यशालाएं, जीआईएएन और माइक्रो-क्रेडिट कोर्स भी आयोजित किए जाएंगे।
प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा कि आईआईटी खड़गपुर के साथ यह साझेदारी बीआईटी मेसरा की अकादमिक और शोध क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे छात्रों और शिक्षकों को बेहतर अवसर मिलेंगे तथा राष्ट्रीय विकास से जुड़े शोध कार्यों को मजबूती मिलेगी।
वहीं, आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि यह समझौता ज्ञान के आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाओं और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा, जिससे दोनों संस्थानों के साथ-साथ व्यापक अकादमिक समुदाय को लाभ मिलेगा।
एमओयू के तहत दोनों संस्थान संयुक्त इंटीग्रेटेड एम.टेक-पीएचडी और ड्यूल डिग्री कार्यक्रमों की संभावनाओं पर भी विचार करेंगे। एक संयुक्त एमओयू इम्प्लीमेंटेशन कमेटी हर छह महीने में समझौते की प्रगति की समीक्षा करेगी।
यह साझेदारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना के अनुरूप है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा, जल संसाधन, जलवायु परिवर्तन एवं रक्षा प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देगी। विशेष रूप से बीआईटी मेसरा के छात्रों को आईआईटी खड़गपुर की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और विशेषज्ञ फैकल्टी के साथ काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे पूर्वी भारत में उच्च शिक्षा और शोध को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।