रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने जमीन विवाद से जुड़े मामलों में प्रशासन की भूमिका को सीमित करते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि निजी जमीन की मापी और सीमांकन करने का अधिकार अंचल अधिकारियों (CO) या पुलिस को नहीं है।
सिल्ली क्षेत्र की रुक्मणी देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने राज्यभर में निजी जमीन की मापी और सीमांकन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सूरज वर्मा ने पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि निजी जमीन से जुड़े विवाद पूरी तरह दीवानी (सिविल) प्रकृति के होते हैं और इनका समाधान केवल सक्षम सिविल कोर्ट में ही संभव है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जमीन की पैमाइश एक न्यायिक प्रक्रिया है, जिसे प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं सौंपा जा सकता।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर किस कानून के तहत अंचल स्तर के अधिकारी निजी जमीन का सीमांकन कर रहे हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कैबिनेट निर्णय के आधार पर यह अधिकार दिया गया है, तो वह न्यायिक शक्तियों का वैध हस्तांतरण नहीं माना जाएगा।
अदालत ने यह भी कहा कि जमीन विवाद की स्थिति में लोगों को पुलिस या अंचल कार्यालय के बजाय सिविल कोर्ट का रुख करना चाहिए। पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि जमीन की मापी करना।
मामले की अगली सुनवाई अब छह सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।