रांची: शिव शिष्य परिवार, रांची के तत्वावधान में “शिव शिष्यता की पृष्ठभूमि, व्याप्ति एवं प्रयोजन” विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का रविवार को अग्रसेन भवन, रांची में शांतिपूर्ण माहौल में समापन हुआ। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए करीब 550 शिवशिष्यों ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साहब श्री हरिन्द्रानंद जी के संदेश “आओ चलें शिव की ओर” को प्रमुखता से रखा गया। इस अवसर पर श्रीमती बरखा आनंद ने बताया कि लगभग आठ वर्ष पूर्व साहब ने पहली बार यह संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि समाज, परिवार और मानवता को भगवान शिव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाली आध्यात्मिक पुकार है। उन्होंने सभी से देश, समाज और परिवार की मर्यादाओं को मजबूत करते हुए शिव की ओर निरंतर अग्रसर रहने का आह्वान किया।

गुरु, सद्गुरु और जगतगुरु की भूमिका पर चर्चा
कार्यशाला में अर्चित आनंद ने गुरु, सद्गुरु एवं जगतगुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु मनुष्य के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है, जबकि सद्गुरु अपनी कृपा से शिष्य के मन में परमात्मा के प्रति प्रेम का संचार कर उसे शिवत्व की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि जगतगुरु समस्त सद्गुरुओं के भी गुरु माने जाते हैं और उनका दायित्व संपूर्ण मानवता का मार्गदर्शन करना है।
आध्यात्मिक प्रकाश ही शिव तक पहुंचने का मार्ग
शिव शिष्य परिवार के सचिव अभिनव आनंद ने “शिष्यानुभूति – एक प्रकाश स्तंभ” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भौतिक प्रकाश जहां केवल रास्ता दिखाता है, वहीं आध्यात्मिक प्रकाश मनुष्य को भगवान शिव तक पहुंचाने का माध्यम बनता है।
कार्यक्रम के अंत में गौतम कुमार ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों से आए शिवशिष्यों ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में राजेश, गौतम, शिवकुमार विश्वकर्मा, रजनीश, रणधीर और आदित्य सहित कई सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।