रांची: झारखंड के अपराध जगत में एक और बड़े नाम का अंत हो गया। कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा जामताड़ा में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस का कहना है कि साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल ले जाने के दौरान उसने भागने की कोशिश की और एक जवान का हथियार छीनकर फायरिंग का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
सुजीत सिन्हा की मौत ने पिछले साल हुए अमन साहू एनकाउंटर की याद ताजा कर दी है। 11 मार्च 2025 को अमन साहू भी पुलिस कस्टडी से रांची लाए जाने के दौरान पलामू में हुई मुठभेड़ में मारा गया था। पुलिस का दावा था कि उसके गुर्गों ने हमला कर उसे छुड़ाने की कोशिश की थी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई।
दिलचस्प बात यह है कि कभी अमन साहू और सुजीत सिन्हा एक ही आपराधिक नेटवर्क के हिस्से माने जाते थे। समय के साथ दोनों के रास्ते अलग हो गए और उन्होंने अपने-अपने गिरोह खड़े कर लिए। बाद में सुजीत सिन्हा ने प्रिंस खान गैंग से गठजोड़ कर लिया, जबकि अमन साहू अपना अलग नेटवर्क चलाता रहा।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों गैंगस्टरों पर रंगदारी, हत्या, ठेकेदारी विवाद और संगठित अपराध से जुड़े कई गंभीर मामले दर्ज थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि जेल में रहने के बावजूद दोनों का नेटवर्क सक्रिय था और उनके गुर्गे झारखंड के कई जिलों में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
लगातार दो बड़े गैंगस्टरों के इस तरह पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद झारखंड के अपराध जगत में हलचल है। पुलिस का कहना है कि संगठित अपराध और गैंग नेटवर्क के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। वहीं, दोनों मामलों में पुलिस ने अपनी कार्रवाई को कानूनसम्मत और आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई बताया है।