खूंटी में फादर बेनेदिक्त बारला पर हमले के बाद गरमाया मामला, रतन तिर्की बोले—धर्मांतरण के आरोपों की जांच कानून के दायरे में हो

Mahak Kumari
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रांची: झारखंड में पादरियों और मिशनरी संस्थानों से जुड़े लोगों पर कथित हमलों का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। खूंटी में विद्यालय के प्राचार्य फादर बेनेदिक्त बारला पर हुए हमले के बाद ईसाई समुदाय की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। समुदाय से जुड़े संगठनों का दावा है कि वर्ष 2015 से 2026 के बीच राज्य के विभिन्न जिलों में इस तरह की 150 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि और सभी मामलों का एकीकृत आधिकारिक रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है।

खूंटी की घटना ने फिर खींचा ध्यान

21 अक्टूबर 2026 को खूंटी में आरसी बालक मध्य विद्यालय के प्राचार्य फादर बेनेदिक्त बारला पर हमले की खबर सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, वह विद्यालय परिसर में गंभीर रूप से घायल मिले थे। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रांची के अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद स्थानीय लोगों और मसीही समुदाय से जुड़े लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और समुदाय के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने की बात सामने आई। फिलहाल हमले के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

आंकड़ों में सामने आईं घटनाएं

ईसाई समुदाय के मुद्दों पर काम करने वाले संगठनों के अनुसार, पिछले एक दशक से अधिक समय में झारखंड के विभिन्न हिस्सों में मारपीट, धमकी, चर्चों में तोड़फोड़, प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद और सामाजिक बहिष्कार जैसी घटनाएं सामने आई हैं।

उपलब्ध विवरणों के मुताबिक, वर्ष 2016 में 19, 2017 में 12 और 2018 में सात घटनाओं का उल्लेख मिलता है। वहीं, वर्ष 2020 की पहली छमाही में 21 घटनाओं की जानकारी एक अन्य विवरण में दी गई है। वर्ष 2021 से 2026 के बीच भी 50 से अधिक मामले सामने आने का दावा किया गया है। इन आंकड़ों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर संभव है। इसलिए कुल घटनाओं की संख्या को आधिकारिक रूप से सत्यापित आंकड़ा मानने से पहले संबंधित स्रोतों और मामलों का मिलान जरूरी है।

कई जिलों में सामने आए विवाद और शिकायतें

झारखंड में पिछले वर्षों के दौरान मिशनरी संस्थानों और ईसाई समुदाय से जुड़े लोगों के मामलों ने कई बार सुर्खियां बटोरी हैं।

  • हजारीबाग, 2015: होली क्रॉस और सेंट जेवियर्स स्कूलों में हंगामे तथा तोड़फोड़ की खबरें सामने आई थीं।
  • खूंटी और रांची, 2018: कोचांग में नाबालिग लड़कियों से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में एक मिशनरी स्कूल के फादर की गिरफ्तारी हुई थी। इसी वर्ष रांची के निर्मल हृदय से जुड़े शिशुओं की कथित बिक्री का मामला भी सामने आया था। ये मामले आपराधिक जांच और संस्थागत जवाबदेही से संबंधित थे।
  • साहिबगंज, 2019: मुंडली स्थित सेंट जॉन बर्कमन्स इंटर कॉलेज में भीड़ के पहुंचने, छात्रों से मारपीट और परिसर में तोड़फोड़ की खबर सामने आई थी।
  • धनबाद और पश्चिमी सिंहभूम, 2020: कथित धर्मांतरण के आरोपों के बीच मारपीट, चर्च निर्माण स्थल को नुकसान पहुंचाने और परिवारों को धमकी देने जैसी शिकायतों का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में किया गया।
  • पश्चिमी सिंहभूम, 2021: मंगापाट सिरसाई गांव में ईसाई धर्म अपनाने वाले तीन आदिवासी परिवारों के सामाजिक बहिष्कार की खबर सामने आई थी।
  • गढ़वा, 2023: प्रार्थना के लिए पहुंचे चार लोगों के साथ कथित मारपीट की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।
  • टाटानगर, 2025: रेलवे स्टेशन पर एक नन, एनजीओ के कर्मचारियों और नाबालिगों को पूछताछ के लिए रोके जाने का मामला सामने आया था। शिकायत में मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोप लगाए गए थे। पूछताछ के बाद सभी को छोड़ दिया गया था।

इन मामलों की प्रकृति अलग-अलग रही है। कुछ मामले कथित हमलों और धमकियों से जुड़े हैं, जबकि कुछ आपराधिक आरोपों, जांच या धार्मिक गतिविधियों को लेकर हुए विवादों से संबंधित हैं।

रतन तिर्की ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

पूर्व टीएससी सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता रतन तिर्की ने ईसाई समुदाय पर हमलों से जुड़ी शिकायतों को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि उनके आकलन के अनुसार, पहले की तुलना में मिशनरी फादरों पर हमलों में कमी आई है, लेकिन अलग-अलग थाना क्षेत्रों से अब भी छिटपुट घटनाओं की शिकायतें सामने आती रहती हैं। रतन तिर्की ने कहा कि कई बार धर्मांतरण का आरोप लगाकर लोगों के साथ मारपीट की जाती है। यदि किसी व्यक्ति को जबरन धर्मांतरण की शिकायत है, तो उसे संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया जाना चाहिए और कानून के अनुसार जांच होनी चाहिए। किसी आरोप के आधार पर किसी के साथ हिंसा करना या कानून अपने हाथ में लेना उचित नहीं है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ईसाई संस्थानों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। किसी भी व्यक्ति या समुदाय की सुरक्षा उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता दोनों अहम

झारखंड में मिशनरी संस्थानों से जुड़े विवादों के बीच दो प्रमुख मुद्दे सामने आते हैं—जबरन धर्मांतरण की शिकायतों की कानूनी जांच और धार्मिक पहचान के आधार पर किसी के साथ हिंसा या भेदभाव न होना। किसी भी आरोप की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। वहीं, हमले या धमकी की शिकायत मिलने पर पुलिस की निष्पक्ष कार्रवाई और पीड़ितों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।

खूंटी में फादर बेनेदिक्त बारला पर हुए हमले के मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना के कारणों और जिम्मेदार लोगों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह घटना राज्य में मिशनरी संस्थानों और ईसाई समुदाय की सुरक्षा को लेकर जारी बहस को फिर सामने ले आई है।

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