रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा। इस बीच राज्य के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं अब किसी एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे देश के सामने खड़ी एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा माफिया संगठित तरीके से युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं, इसलिए इसके खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी रणनीति बनाने की आवश्यकता है।
सिर्फ सरकार नहीं, सभी दलों की साझा जिम्मेदारी
मंत्री ने कहा कि जिस तरह भूमि और शिक्षा क्षेत्र में माफिया सक्रिय रहे हैं, उसी तरह अब परीक्षा माफिया भी अपनी जड़ें मजबूत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि केवल सरकार पर आरोप लगाने से समाधान नहीं निकलेगा। सत्ता और विपक्ष सहित सभी राजनीतिक दलों को मिलकर ऐसी पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
छात्रों की मांगों पर होगा सकारात्मक विचार
चमरा लिंडा ने कहा कि सरकार प्रतियोगी छात्रों की भावनाओं को समझती है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है। उन्होंने बताया कि जल्द ही छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की जाएगी। उनकी मांगों पर विचार के लिए गठित समिति सभी पहलुओं का अध्ययन कर उचित निर्णय लेगी। सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सुधार के लिए छात्रों से भी मांगे सुझाव
मंत्री ने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि वे केवल विरोध तक सीमित न रहें, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए अपने सुझाव भी दें। उनका कहना था कि सरकार और छात्रों के साझा प्रयास से ही भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
विपक्ष को जवाब सुनने का भी रखना चाहिए धैर्य
विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार सदन में उठने वाले हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन जवाब सुनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। स्वस्थ बहस और जवाबदेही से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है।