रांची: राजधानी रांची में साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक व्यक्ति से 3 लाख 40 हजार रुपये की ठगी कर ली। हरमू के बसंत विहार निवासी अतुल कुमार को जालसाजों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर फोन किया और उनके आधार कार्ड को कथित दिल्ली बम ब्लास्ट मामले से जोड़कर गिरफ्तारी का भय दिखाया। आरोपियों ने भरोसा जमाने के लिए पुलिस की वर्दी पहनकर व्हाट्सऐप वीडियो कॉल भी किया। इसके बाद पीड़ित को बताया गया कि कर्नाटक के हुबली स्थित एक आईसीआईसीआई बैंक खाते से उनके नाम पर 2.55 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। इसे मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ते हुए फर्जी गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति जब्ती के दस्तावेज भी भेजे गए।
‘क्लियरेंस सर्टिफिकेट’ के नाम पर वसूले 3.40 लाख
साइबर अपराधियों ने अतुल कुमार से कहा कि यदि वह सुरक्षा राशि के तौर पर 3.40 लाख रुपये जमा कर देते हैं, तो उन्हें गैर-संलिप्तता प्रमाण पत्र यानी क्लियरेंस सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा और रकम बाद में वापस कर दी जाएगी। आरोपियों के दबाव में उन्होंने 11 अगस्त को इंडसइंड बैंक के एक खाते में 3.40 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
SIP तुड़वाकर 18 लाख लेने की थी तैयारी
रकम मिलने के बाद भी जालसाज नहीं रुके। उन्होंने पीड़ित पर दबाव बनाकर म्यूचुअल फंड की SIP तोड़ने और करीब 18 लाख रुपये और ट्रांसफर करने को कहा। इतनी बड़ी रकम की मांग के बाद अतुल कुमार को ठगी का शक हुआ और पूरा मामला समझ में आया। उन्होंने तत्काल बैंक पहुंचकर अपने खातों पर रोक लगवाई और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद रांची साइबर क्राइम थाने में 19 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज की गई।
साइबर पुलिस कर रही जांच
पुलिस अब मामले में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप आईपी लॉग्स और जिस बैंक खाते में रकम भेजी गई, उसकी जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि इसके पीछे अंतरराज्यीय डिजिटल अरेस्ट गिरोह सक्रिय है। आरोपियों की पहचान और पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी है।