Ranchi: झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों को सचिव (Secretary) स्तर की जिम्मेदारी नहीं मिलने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। जबकि देश के कई राज्यों में IFS अधिकारी सरकार के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर कार्य कर रहे हैं, झारखंड में उन्हें प्रायः स्पेशल सेक्रेटरी (Special Secretary) तक ही सीमित रखा जाता है।
प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि ओडिशा, मध्य प्रदेश, केरल और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में IFS अधिकारियों को सचिव स्तर की जिम्मेदारियां दी जाती हैं, लेकिन झारखंड में ऐसा देखने को नहीं मिलता। राज्य के वरिष्ठ IFS अधिकारियों में डीडी शर्मा और बीडी सिंह के नाम भी इस संदर्भ में चर्चा में रहे हैं। बताया जाता है कि बीडी सिंह को सचिव बनाने का प्रस्ताव भी आया था, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ सका।
इस मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) कैडर नियमों का हवाला दिया जाता है। नियमों के अनुसार सचिव स्तर के अधिकांश पद IAS कैडर के लिए निर्धारित होते हैं। हालांकि विशेष परिस्थितियों में गैर-कैडर अधिकारियों की नियुक्ति का भी प्रावधान है, जिसके लिए केंद्र सरकार और निर्धारित अवधि के बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की स्वीकृति आवश्यक होती है।
जानकारों का मानना है कि यदि राज्य सरकार चाहे तो ऑल इंडिया सर्विसेज के अन्य अधिकारियों, विशेषकर IFS और IPS अधिकारियों की प्रशासनिक क्षमता का उपयोग नीति निर्माण और शासन के उच्च स्तर पर भी किया जा सकता है।
उधर, IFS अधिकारियों की क्षमता का उदाहरण केंद्र सरकार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिलता है। कई अधिकारी विदेश मंत्रालय समेत केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में सचिव, संयुक्त सचिव और अन्य वरिष्ठ पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि झारखंड में भी योग्य अधिकारियों को उनकी क्षमता के अनुरूप अवसर मिलना चाहिए।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि शासन व्यवस्था में पद से अधिक महत्वपूर्ण अधिकारी की योग्यता और अनुभव होता है। ऐसे में राज्य में सभी अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को समान अवसर देने पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।