रांची: पैनम कोल माइंस में कथित अवैध खनन और रॉयल्टी नुकसान से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश एस.एम. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार एवं संबंधित पक्षों द्वारा प्रस्तुत जवाबों पर असंतोष व्यक्त करते हुए सभी संबद्ध कंपनियों को स्वतंत्र और विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।
यह मामला जनहित याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष लाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि निर्धारित सीमा से कहीं अधिक मात्रा में कोयले का खनन किया गया, जिससे राज्य सरकार को रॉयल्टी के रूप में करीब 900 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। याचिका में इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक कंपनी अपनी भूमिका और तथ्यों को लेकर अलग-अलग जवाब प्रस्तुत करे, ताकि मामले के विभिन्न पहलुओं की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सामूहिक जवाबों के बजाय व्यक्तिगत जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
याचिका के अनुसार, कथित अनियमितताएं पाकुड़ और दुमका जिले स्थित पचवारा नॉर्थ तथा पचवारा सेंट्रल कोल माइंस से संबंधित हैं। इन खदानों में आवंटित क्षेत्र से अधिक खनन किए जाने और रॉयल्टी भुगतान में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी। तब तक सभी संबंधित कंपनियों और पक्षों को अदालत के निर्देशानुसार अपना-अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।