Ranchi: झारखंड में सड़क सुरक्षा, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया, वाहन निबंधन और गाड़ियों के अवैध मॉडिफिकेशन से जुड़े मुद्दों पर दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने राज्य के परिवहन आयुक्त और परिवहन विभाग के प्रधान सचिव को 10 जुलाई 2026 तक अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह जनहित याचिका इंटर्न लॉयर मिथुन कुमार की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य के मोटरयान विभाग में तकनीकी पदों की कमी और निर्धारित मानकों की अनदेखी के कारण सड़क सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं। इसमें वाहन निबंधन की प्रक्रिया, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था तथा वाहनों में किए जा रहे अवैध मॉडिफिकेशन पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति ने वर्ष 2019 में परिवहन विभाग में आरटीओ और एआरटीओ जैसे मध्य प्रबंधन स्तर के पदों पर तकनीकी योग्यता रखने वाले अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की अनुशंसा की थी। इसके बावजूद झारखंड में कई महत्वपूर्ण दायित्व गैर-तकनीकी कर्मियों द्वारा निभाए जाने का आरोप लगाया गया है।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है।