Ranchi: झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। CID की जांच में अब तक तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत कुल 25 आरोपियों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है। जांच के दौरान अलग-अलग परीक्षाओं और एजेंसियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई है।
मामले को लेकर विपक्ष और परीक्षार्थियों का एक वर्ग लगातार CBI जांच की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने JPSC और JSSC से जुड़े मामलों की अलग-अलग जांच के लिए SIT का गठन किया है। इसी बीच हाईकोर्ट के हालिया आदेशों ने रद्द की गई कुछ परीक्षाओं और नियुक्तियों के मामले को नया मोड़ दे दिया है।
नेपाल कनेक्शन से खुला परीक्षा सिंडिकेट का राज
CID की शुरुआती जांच में कथित अंतरराज्यीय परीक्षा सिंडिकेट की जानकारी सामने आई। जांच के दौरान यह आरोप सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर प्रश्नपत्र और उसके उत्तर याद करवाए गए थे। इस मामले में 28 अभ्यर्थियों को डिबार किया गया था। JPSC मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद TDPL से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई। रामवीर सिंह, अभय तिवारी और परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता गुप्ता से पूछताछ के बाद जांच की कड़ियां आगे बढ़ीं। पूछताछ के दौरान अन्य लोगों और कथित परीक्षा नेटवर्क से जुड़े कई अहम इनपुट मिलने की बात सामने आई। जांच का दायरा बाद में JSSC-CGL और 14वीं JPSC तक सीमित नहीं रहा। FRO, CDPO, 11वीं-13वीं JPSC और PGT जैसी अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को भी जांच के दायरे में लाया गया।
FIR से आंदोलन और गिरफ्तारी तक कैसे बढ़ा मामला?
21 जुलाई: CID ने परीक्षा अनियमितता मामले में CID थाना कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया। इसी दिन JPSC कार्यालय में छापेमारी हुई और कई लोगों से पूछताछ की गई। इसके बाद तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दिया।
23 जुलाई: CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के आवास पर छापेमारी की। इसी दौरान JPSC मामले से जुड़े अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई तेज हुई।
24 जुलाई: JPSC और JSSC भर्ती में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों ने बड़े आंदोलन की शुरुआत की।
28 जुलाई: पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते से CID की पूछताछ शुरू हुई। इसी दौरान छात्रों का आंदोलन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक पहुंच गया।
29 जुलाई: अभ्यर्थी न्याय मंच के नेतृत्व में छात्रों ने संविधान यात्रा निकाली।
30-31 जुलाई: विभिन्न छात्र संगठनों ने प्रदर्शन और कैंडल मार्च के जरिए भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग उठाई।
1 से 4 अगस्त: छात्रों ने आंदोलन तेज करते हुए मार्च, मशाल जुलूस और फ्लैश लाइट मार्च निकाला।
5 अगस्त: सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी बनाई और मुख्यमंत्री की ओर से बातचीत का न्योता दिया गया।
6 अगस्त: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के जरिए छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत कर आंदोलन समाप्त करने और जल ग्रहण करने की अपील की।
7 अगस्त: विधानसभा मार्च के दौरान विवाद हुआ। इसी दिन छात्र प्रतिनिधियों और सरकार की चार सदस्यीय कमेटी के बीच बातचीत भी हुई।
8 अगस्त: स्टेट गेस्ट हाउस में छात्रों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई।
10 अगस्त: बड़ी संख्या में छात्रों ने विधानसभा घेराव का प्रयास किया। इसी दिन पूर्व JPSC सदस्य अजिता भट्टाचार्य CID के समक्ष उपस्थित हुईं और CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया।
17-18 अगस्त: जांच के दौरान अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रज कुमार राम, अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी समेत अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई।
19 अगस्त: करीब 26 दिनों से चल रहे JPSC-JSSC रिफॉर्म न्याय मंच के आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की गई।
20 अगस्त: 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी।
21 अगस्त: JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले पर भी हाईकोर्ट की ओर से रोक लगाए जाने की जानकारी सामने आई।
सरकार ने बनाई दो SIT
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने दो अलग-अलग SIT गठित की हैं। JPSC परीक्षा से जुड़े मामले की जांच के लिए ADG मनोज कौशिक को SIT का प्रमुख बनाया गया है, जबकि JSSC-CGL मामले की जांच की जिम्मेदारी IG अनूप बिरथरे के नेतृत्व वाली SIT को दी गई है।
दोनों SIT को निर्धारित समय सीमा में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है।
अब आगे क्या?
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद अब जांच, गिरफ्तारी, छात्र आंदोलन और न्यायिक कार्रवाई—चारों मोर्चों पर आगे बढ़ रहा है। एक ओर CID कथित परीक्षा सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, तो दूसरी ओर हाईकोर्ट के आदेशों के बाद परीक्षा रद्द करने और नियुक्तियों पर सरकार के फैसलों को लेकर स्थिति भी बदल रही है। आने वाले दिनों में SIT की रिपोर्ट, CID की आगे की कार्रवाई और हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।