Ranchi: झारखंड के चर्चित शराब घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट में पेश की गई जानकारी में ACB ने दावा किया है कि उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव विनय चौबे को बैग भर-भर कर करोड़ों रुपये की रिश्वत दी गई।
यह खुलासा छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मुख्य आरोपी अरुण पति त्रिपाठी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। ACB के अनुसार, यह रकम किसी “शगुन” के तौर पर नहीं बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार का हिस्सा थी।
चार लोगों ने कबूला सच
जांच के दौरान चार प्रमुख व्यक्तियों—अमित मित्तल, संजीव जैन, विधु गुप्ता और नवेंदु शेखर—ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि उन्होंने सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से विनय चौबे तक पैसे पहुंचाए।
केस डायरी में दर्ज अहम जानकारी
ACB की केस डायरी के मुताबिक, करीब 5 करोड़ रुपये की रिश्वत विनय चौबे के आवास तक पहुंचाई गई। यह राशि बैगों में भरकर दी गई थी, जो मामले की गंभीरता को दर्शाती है।
नीति में बदलाव के बदले रिश्वत का आरोप
जांच एजेंसी का कहना है कि यह पैसा शराब नीति में बदलाव कर एक खास सिंडिकेट को फायदा पहुंचाने के बदले दिया गया था। आरोपियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्य इस बात की ओर इशारा करते हैं कि विभाग के भीतर भ्रष्टाचार गहराई तक फैला हुआ था।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
ACB ने कोर्ट में पेश तथ्यों के आधार पर मनी ट्रेल की जांच तेज कर दी है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
इस खुलासे के बाद राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, वहीं विनय चौबे की मुश्किलें भी बढ़ती नजर आ रही हैं।