रांची: झारखंड में कानून-व्यवस्था और पुलिस जांच की गुणवत्ता को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का रुख इन दिनों बेहद सख्त हो गया है। बीते कुछ महीनों में सामने आए कई मामलों में अदालत ने पुलिस की सुस्ती और संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इतना ही नहीं, कई मामलों में राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कोर्ट में तलब कर कड़ी फटकार भी लगाई गई है।
बोकारो में एक 18 वर्षीय युवती के लापता होने के मामले में पुलिस की लापरवाही तब उजागर हुई, जब शिकायत के बावजूद कई दिनों तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। अदालत में मामला पहुंचने के बाद सख्ती दिखाई गई और सुनवाई के दो दिन के भीतर युवती का कंकाल बरामद हुआ। इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
वहीं, चतरा में एक छात्र को अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले में भी कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों को तलब किया गया और उनके मोबाइल तक जब्त कर लिए गए। बाद में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
हजारीबाग में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले में अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस की धीमी कार्रवाई पर नाराजगी जताई। घटना के कई दिनों बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की, जिसके बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इसी तरह गुमला में आठ साल पुराने एक लापता किशोरी के मामले में भी हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जांच दोबारा शुरू की गई। अदालत ने साफ चेतावनी दी कि तय समय में प्रगति नहीं होने पर मामला सीबीआई को सौंपा जा सकता है। इसके बाद विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर जांच तेज कर दी गई है।
लगातार सख्ती और निगरानी के चलते अब पुलिस महकमे में हलचल तेज है और मामलों की जांच में तेजी लाने की कोशिश की जा रही है।