राज्यसभा की जंग में होटल बने सियासी अखाड़ा, झारखंड में शुरू हुआ ‘विधायक बचाओ अभियान’

Mahak Kumari
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झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। दोनों प्रमुख गठबंधन अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति में जुट गए हैं। इसी कड़ी में अब राज्य की राजनीति में एक बार फिर ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। सूत्रों के अनुसार, कई विधायकों को होटल और सुरक्षित ठिकानों पर ठहराया जा रहा है ताकि संभावित क्रॉस वोटिंग और टूट-फूट की आशंकाओं को रोका जा सके।

राज्यसभा की दो सीटों के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। महागठबंधन की ओर से जीत का दावा किया जा रहा है, वहीं एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की सक्रियता ने चुनावी समीकरणों को और रोचक बना दिया है। ऐसे में दोनों खेमों ने अपने विधायकों की निगरानी बढ़ा दी है।

सूत्रों के मुताबिक, एनडीए ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें होटल में ठहराने की तैयारी की है। वहीं महागठबंधन भी अपने विधायकों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है। हाल ही में एनडीए की बैठक से सात विधायकों की गैरमौजूदगी ने सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव का इतिहास अप्रत्याशित परिणामों का रहा है। ऐसे में संख्या बल के बावजूद दल कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं। इसी वजह से विधायकों को एक साथ रखने की रणनीति अपनाई जा रही है।

हालांकि, सभी दल सार्वजनिक तौर पर अपने विधायकों के एकजुट होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन पर्दे के पीछे जारी बैठकों, संपर्क अभियानों और होटल राजनीति ने साफ कर दिया है कि राज्यसभा चुनाव इस बार केवल वोटों का गणित नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।

18 जून को होने वाले मतदान से पहले अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दल अपने विधायकों को पूरी तरह एकजुट रख पाएंगे या फिर झारखंड की राजनीति एक बार फिर किसी नए ‘खेला’ की गवाह बनेगी।

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