Ranchi: न्यूनतम वेतन कानून लागू करने की मांग तेज: भाजपा किसान मोर्चा झारखंड प्रदेश के नेता एवं झारखंड राज्य समाज कल्याण आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के संयोजक जय प्रकाश पांडेय ने केंद्र और राज्य सरकारों से आंगनवाड़ी सेविका-सहायिकाओं को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के श्रम मंत्रालय द्वारा जारी न्यूनतम वेतनमान नियम और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सभी राज्यों को करना चाहिए।
जेपी पांडेय ने कहा कि वर्षों से आंगनवाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं शोषण और आर्थिक परेशानी झेलते हुए काम कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो उचित वेतन मिल रहा है और न ही सरकारी कर्मचारी का दर्जा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो बिहार और झारखंड समेत पूरे देश में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
“महिलाओं के साथ हो रहा अन्याय”
उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को न्यूनतम सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है। कई महिलाएं वर्षों सेवा देने के बाद बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के रिटायर हो रही हैं, जबकि कई कार्यरत महिलाओं की मृत्यु भी हो चुकी है।
जेपी पांडेय ने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी आंगनवाड़ी कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की बात कह चुके हैं, लेकिन अधिकांश राज्य सरकारें अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा सकी हैं।
“कुपोषण मुक्त भारत बनाने में अहम भूमिका”
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने पिछले लगभग 50 वर्षों से कुपोषण दूर करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोरोना काल में भी उन्होंने “कोरोना बैरियर” के रूप में काम किया।
जेपी पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में आंगनवाड़ी कर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप सभी राज्यों को जल्द से जल्द सेविका और सहायिकाओं को राज्यकर्मी का दर्जा देना चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द मांगें नहीं मानीं तो देशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा। आंगनवाड़ी कर्मियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करेगा।