Ranchi/New Delhi: झारखंड आंदोलन के महानायक, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिवंगत शिबू सोरेन को मंगलवार को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से मरणोपरांत सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान उनके परिवार को प्रदान किया।
दिशोम गुरु के नाम की घोषणा होते ही राष्ट्रपति भवन का माहौल गौरव और सम्मान से भर उठा। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उस लंबे संघर्ष को समर्पित था, जिसने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए दशकों तक आवाज बुलंद की और झारखंड राज्य के गठन की नींव रखी।
समारोह में शिबू सोरेन की धर्मपत्नी रूपी सोरेन ने मंच पर पहुंचकर पद्म भूषण सम्मान ग्रहण किया। इस दौरान उनकी आंखों में गर्व और भावुकता दोनों झलक रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो नेमरा गांव की मिट्टी से शुरू हुई संघर्ष की यात्रा आज देश के सर्वोच्च सम्मान के मंच तक पहुंच गई हो।
केंद्र सरकार ने 25 जनवरी 2026 को लोक कल्याण और सामाजिक योगदान के क्षेत्र में शिबू सोरेन के उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा की थी। यह सम्मान आज औपचारिक रूप से उनके परिवार को सौंपा गया।
इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी शिबू सोरेन की बहू कल्पना सोरेन भी बनीं। समारोह में उनकी उपस्थिति ने इस गौरवपूर्ण अवसर को और अधिक भावनात्मक बना दिया। झारखंड सहित देशभर के आदिवासी समाज और उनके समर्थकों के लिए यह पल गर्व, सम्मान और स्मृतियों से भरा रहा।