रांची: झारखंड में आयोजित आदिवासी महाजुटान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर आदिवासी समाज के साथ लंबे समय तक अन्याय और वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया। इस दौरान पूर्व विधायक राम कुमार पाहन और सनी टोप्पो समेत कई नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश को आजाद हुए 79 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आदिवासी समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक आदिवासियों को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया।
अलग झारखंड राज्य को लेकर कांग्रेस पर सवाल
बीजेपी नेताओं ने अलग झारखंड राज्य के गठन के इतिहास का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। वक्ताओं ने कहा कि जब दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नेतृत्व में अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा था, उस समय केंद्र में नरसिम्हा राव की सरकार थी। उनका दावा था कि यदि कांग्रेस उस समय इच्छाशक्ति दिखाती तो झारखंड का गठन पहले ही हो सकता था। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आदिवासी समाज की भावनाओं को समझने के बजाय उन्हें राजनीतिक रूप से बरगलाने का काम किया।
झारखंड की बदलती जनसांख्यिकी पर जताई चिंता
कार्यक्रम में झारखंड की बदलती डेमोग्राफी को लेकर भी चिंता जाहिर की गई। बीजेपी नेताओं ने कहा कि राज्य में आदिवासी आबादी के अनुपात में लगातार गिरावट चिंता का विषय है। उन्होंने आदिवासी समाज से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। नेताओं ने कहा कि जनगणना के आंकड़े किसी राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि सरकारी आंकड़े हैं। कार्यक्रम में दावा किया गया कि 1991 में झारखंड क्षेत्र में आदिवासी आबादी का अनुपात 35.38 प्रतिशत था, जो 2011 में घटकर 26.20 प्रतिशत रह गया। इसी आधार पर वक्ताओं ने भविष्य में आदिवासी आबादी के अनुपात में और गिरावट की आशंका जताई।
मिशनरियों और चर्च को लेकर भी लगाए आरोप
महाजुटान में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कुछ वक्ताओं ने मिशनरियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि कांग्रेस ने आदिवासी समाज को प्रभावित करने के लिए मिशनरी संस्थाओं का इस्तेमाल किया। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों के समर्थन में कार्यक्रम के दौरान कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। वहीं, ग्रामीण इलाकों के कुछ कैथोलिक चर्चों की ओर से लोगों को रैली में शामिल होने के लिए पत्र जारी करने और शामिल नहीं होने पर जुर्माने की बात कहे जाने का भी दावा किया गया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
बीजेपी का दावा- आदिवासी अधिकारों की होगी रक्षा
कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं ने कहा कि अब आदिवासी समाज के अधिकारों, परंपरा और संस्कृति के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। नेताओं ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आदिवासियों की पारंपरिक संस्कृति और अधिकारों की सुरक्षा की बात कही। बीजेपी नेताओं ने आदिवासी समाज से कांग्रेस की कथित राजनीति से सावधान रहने और अपने हितों को प्राथमिकता देने की अपील की। आदिवासी महाजुटान के मंच से दिए गए इन बयानों के बाद झारखंड में इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज होने के संकेत हैं।