रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, एजेंसी चयन और सीआईडी जांच को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने कहा कि आयोग की कार्यप्रणाली पूरी तरह नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत संचालित होती है। वहीं, सीआईडी ने उन्हें 28 जुलाई को पूछताछ के लिए बुलाया है।
CID के सामने रखेंगे अपना पक्ष
सूत्रों के अनुसार, सीआईडी की टीम पूर्व अध्यक्ष से परीक्षा संचालन, परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया, आउटसोर्स एजेंसी के चयन और आयोग के प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी परीक्षा से जुड़े विवादों की परत-दर-परत जांच कर रही है।
कार्यभार संभालते समय आयोग कई चुनौतियों से घिरा था
एल. ख्यांगते ने कहा कि जब उन्होंने मार्च 2025 में आयोग की जिम्मेदारी संभाली थी, तब कई भर्ती प्रक्रियाएं और लंबित मामले आयोग के सामने बड़ी चुनौती बने हुए थे। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में बैकलॉग मामलों के निपटारे और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि आयोग की कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बन सके।
उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा पर दिया जोर
परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा और स्ट्रांग रूम प्रबंधन अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया है। इसके लिए तय मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन और रिजल्ट प्रोसेसिंग जैसी प्रक्रियाएं भी निर्धारित नियमों के अनुसार होती हैं और इनमें व्यक्तिगत हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं रहती।
शिकायतों पर भी रखी अपनी बात
पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि आयोग को ईमेल, डाक और अन्य माध्यमों से लगातार शिकायतें और सुझाव प्राप्त होते रहते हैं। ऐसे मामलों में आयोग संबंधित प्रक्रियाओं के तहत कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना हमेशा आयोग की प्राथमिकता रही है।
एजेंसी चयन को लेकर दी सफाई
परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी को लेकर उठे विवाद पर ख्यांगते ने कहा कि किसी भी एजेंसी का चयन निर्धारित मानकों और जांच-परख के बाद किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि बाद में किसी एजेंसी के खिलाफ कोई तथ्य सामने आए हों या वह ब्लैकलिस्ट हुई हो, तो इसकी जानकारी उस समय उनके पास नहीं थी। उन्होंने निष्पक्ष जांच का समर्थन करते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर गलती हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
सामूहिक निर्णय से चलता है आयोग
अध्यक्ष की भूमिका को लेकर उन्होंने कहा कि आयोग के फैसले व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक रूप से लिए जाते हैं। बोर्ड और सदस्यों के साथ विचार-विमर्श के बाद ही महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं। आयोग की कई प्रक्रियाएं गोपनीय होती हैं, जिनका पालन नियमों के तहत किया जाता है।