रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के बीच सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और नेता Salman Khurshid ने नामांकन की स्क्रूटनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह पूर्व-नियोजित बताया है।
मीडिया से बातचीत के दौरान सलमान खुर्शीद ने आरोप लगाया कि संबंधित उम्मीदवार के नामांकन पत्र में संपत्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं थीं। कांग्रेस की ओर से इस पर आपत्ति दर्ज कराई गई, लेकिन आपत्ति उठने के बाद हलफनामे में बदलाव किए जाने की अनुमति दे दी गई। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में नामांकन को स्वीकार करना चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय जल्दबाजी में फैसला लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक वह पूरी प्रक्रिया में शामिल होने पहुंचे, तब तक मामला लगभग तय हो चुका था। उनके मुताबिक, “ऐसा प्रतीत होता है कि सब कुछ पहले से तय था और केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही थीं।”
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि किसी उम्मीदवार के शपथ पत्र में तथ्यात्मक त्रुटियां या अधूरी जानकारियां पाई जाती हैं, तो उसकी गहन जांच होनी चाहिए। पार्टी ने विशेष रूप से उम्मीदवार Parimal Nathwani के हलफनामे में कथित विसंगतियों का मुद्दा उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की है।
हालांकि, रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन पत्रों की जांच के बाद संबंधित उम्मीदवार के नामांकन को वैध माना और उसे मंजूरी दे दी। इसके बाद कांग्रेस ने इस फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में निष्पक्षता सर्वोपरि होनी चाहिए और सभी उम्मीदवारों के लिए समान मानदंड लागू होने चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को आगे भी उठाएगी और आवश्यक होने पर कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।