नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर छात्र आंदोलन और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। प्रदर्शनकारी संगठन अपने घोषित ‘संसद चलो’ कार्यक्रम पर कायम हैं और उन्होंने दोबारा मंच बनाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। आंदोलन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन जारी है, जबकि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी छात्रों के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार बातचीत करना चाहती है तो उसे आगे आकर संवाद स्थापित करना चाहिए। समर्थकों ने जंतर-मंतर पर एक बार फिर जुटकर संसद मार्च की तैयारी शुरू कर दी है।
वहीं, सफदरजंग अस्पताल से जारी अपने हस्तलिखित संदेश में सोनम वांगचुक ने शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं के साथ हुए व्यवहार ने उन्हें चिंतित किया है। उन्होंने कहा कि उनका अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक आंदोलनकारी छात्र नेताओं को सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिलती या उन्हें स्वयं अस्पताल में उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी जाती। उन्होंने सभी से आंदोलन को पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, संसद मार्च के दौरान हुई झड़पों में 50 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान घायल हुए हैं। घायलों में दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
आंदोलन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार भी पूरी तरह सतर्क है। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक कर आंदोलन की स्थिति, संसद सत्र पर उसके संभावित प्रभाव और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। सरकार का मानना है कि आंदोलन में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भी बड़ी भागीदारी है, जबकि कई छात्र अपनी आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख और केंद्रीय गृह सचिव के बीच भी महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें संसद परिसर की सुरक्षा, प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों और विभिन्न राज्यों में आंदोलन के संभावित प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की गई।
उधर, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में दोषियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने सरकार से छात्रों के साथ संवाद स्थापित करने और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदर्शनकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा, सांसदों से मुलाकात की अनुमति और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसी मांगें उठा रहे हैं।
फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। संसद सत्र के बीच यह आंदोलन राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली बातचीत और उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।