रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन (JSBC) की टालमटोल वाली कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। एक मध्यस्थता विवाद की सुनवाई के दौरान बार-बार समय मांगने पर अदालत ने निगम को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह मामले के निपटारे में अनावश्यक देरी करना चाहता है।
मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनाक की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एन.एन. तिवारी को के.एस. मल्टी फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और JSBC के बीच चल रहे विवाद के समाधान के लिए मीडियेटर नियुक्त किया है।
सुनवाई के दौरान JSBC ने अपने प्रबंध निदेशक के तबादले का हवाला देते हुए एक बार फिर समय देने की मांग की। इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे पहले भी 10 हजार रुपये के जुर्माने के साथ स्थगन दिया गया था, लेकिन निगम ने अब तक जुर्माने की राशि जमा नहीं की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एमडी का तबादला जुर्माना न भरने का कोई उचित कारण नहीं हो सकता।
अदालत ने टिप्पणी की कि निगम का रवैया यह दर्शाता है कि वह जानबूझकर मामले को लंबित रखने का प्रयास कर रहा है। यह विवाद 19 जून 2024 को हुए एक समझौते से जुड़ा है। के.एस. मल्टी फैसिलिटी सर्विसेज ने वर्ष 2025 में हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी, जिसका JSBC ने यह कहते हुए विरोध किया था कि समझौते में मध्यस्थता का प्रावधान मौजूद है।
बाद में कंपनी ने याचिका वापस लेकर 4 अक्टूबर 2025 को कानूनी नोटिस के माध्यम से मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू की, लेकिन JSBC ने न तो नोटिस का जवाब दिया और न ही मध्यस्थ की नियुक्ति पर सहमति जताई।
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस चरण में अदालत केवल यह देखती है कि पक्षों के बीच मध्यस्थता समझौता मौजूद है या नहीं। बाकी सभी कानूनी आपत्तियों और विवादों पर फैसला मध्यस्थता न्यायाधिकरण करेगा।