रांची: झारखंड की राजनीति इन दिनों अंदरूनी खींचतान से गरमाई हुई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन के बाद से ही वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर अपनी ही सरकार और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मुखर नजर आ रहे हैं। उनके इस रुख ने न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि पूरे सत्ताधारी गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विवाद उस समय और गहरा गया जब जेटेट नियमावली से भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को हटाने का मुद्दा सामने आया। इस फैसले को लेकर मंत्री के तीखे बयान और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना ने राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।
इस मामले पर झामुमो ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि कैबिनेट से जुड़े मामलों को सार्वजनिक करना अनुचित है। उन्होंने इशारों-इशारों में वरिष्ठ नेताओं को मर्यादा में रहने की नसीहत देते हुए जनादेश का सम्मान करने की बात कही।
वहीं, कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह ने बिना नाम लिए तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में रहना और कांग्रेसी होना अलग-अलग बातें हैं।
कुल मिलाकर, भाषा विवाद ने झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर चल रही खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। आने वाले समय में यह राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत दे रहा है।