रांची: झारखंड में लगातार हो रही बिजली कटौती और खराब व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार अब पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। बुधवार को मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने ऊर्जा विभाग के सभी प्रमुख अधिकारियों के साथ लंबी समीक्षा बैठक की, जिसमें उनका रुख बेहद कड़ा रहा।
बैठक में उन्होंने साफ कहा कि बिजली आपूर्ति में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब हर स्तर पर जवाबदेही तय होगी और चूक पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि जनता को निर्बाध बिजली मिलनी ही चाहिए।
मुख्य सचिव ने बिजली वितरण निगम के फील्ड में तैनात महाप्रबंधकों को निर्देश दिया कि वे केवल दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय रहकर 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें। सभी प्रमंडलों में कंट्रोल रूम बनाने और लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही, संचरण निगम के एमडी केके वर्मा को ट्रांसमिशन से जुड़ी समस्याओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य में पर्याप्त ट्रांसफॉर्मर उपलब्ध हैं और अधिकांश सही हालत में हैं। इस पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि संसाधन होने के बावजूद बिजली बाधित रहना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने पर समय पर सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय है।
स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने सभी सदर और अनुमंडल अस्पतालों में बिजली के दो अलग-अलग स्रोत सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि आपात स्थिति में बिजली बाधित न हो। साथ ही, सोलर पैनल लगाने की जिम्मेदारी जरेडा को सौंपी गई है।
आंधी-पानी के दौरान बिजली व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए अब मजबूत ट्यूबलर और रेल पोल लगाने का फैसला लिया गया है। बैठक में ऊर्जा सचिव के. श्रीनिवासन को पूरी व्यवस्था की निगरानी का जिम्मा दिया गया।
कुल मिलाकर, सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि अब कागजी दावों के बजाय जमीनी स्तर पर सुधार दिखना चाहिए। इस सख्ती के बाद बिजली विभाग में हड़कंप की स्थिति है।