रांची: झारखंड की राजधानी रांची में हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं ने जहां कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए, वहीं राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई. विपक्ष ने इन घटनाओं को सरकार और पुलिस प्रशासन की विफलता बताने की कोशिश की, लेकिन रांची पुलिस ने तेजी से कार्रवाई कर हालात को संभालने का दावा किया है.
पुलिस की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई चर्चित और गंभीर मामलों में 10 से 12 घंटे के भीतर ही अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. इनमें जगन्नाथपुर मंदिर गार्ड हत्या, जमीन कारोबारी भार्गव सिंह मर्डर केस और मोरहाबादी ज्वेलरी लूटकांड जैसे मामले शामिल हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में होने वाली घटनाएं पूरे राज्य की छवि को प्रभावित करती हैं. हालांकि, पुलिस द्वारा त्वरित खुलासा किए जाने से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि अपराधियों पर कानून का शिकंजा मजबूत है. इससे उन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों पर भी कुछ हद तक विराम लगा है, जो इन घटनाओं को लेकर उठ रहे थे.
मोरहाबादी स्थित प्रीति ज्वेलरी दुकान में 7 अप्रैल को हुई लूट की घटना का पुलिस ने महज 10 घंटे में खुलासा कर दिया. बाइक सवार तीन अपराधियों ने हथियार के बल पर करीब एक किलो चांदी के जेवरात और नकदी लूट ली थी. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अधिकांश सामान और हथियार बरामद कर लिया.
वहीं, पंडरा में जमीन कारोबारी भार्गव सिंह की 22 अप्रैल को हुई हत्या के मामले में पुलिस ने एक घंटे के भीतर मास्टरमाइंड विजय टेटे को पकड़ लिया. उसकी निशानदेही पर शूटर सत्यम पाठक को भी गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने भागने की कोशिश में पुलिस पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया.
इसके अलावा, जगन्नाथपुर मंदिर में तैनात गार्ड बिरसा मुंडा की हत्या का भी पुलिस ने 10 घंटे के भीतर खुलासा कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक चोरी के दौरान पहचान उजागर होने के डर से आरोपियों ने गार्ड की हत्या कर दी थी.
लगातार हो रहे त्वरित खुलासों से पुलिस ने यह दिखाने की कोशिश की है कि चुनौतियों के बावजूद अपराध पर नियंत्रण के लिए वह पूरी तरह सक्रिय है।