Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दोहराया है कि राज्य की महिलाओं और आम जनता के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार के प्रस्तावित खान एवं खनिज कानून (MMDR) 2026 को लेकर राज्य सरकार जहां अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है, वहीं जनकल्याणकारी योजनाओं को भी लगातार जारी रखने का दावा कर रही है।
रक्षाबंधन से पहले सरकार ने मंईयां सम्मान योजना के तहत करीब 51 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 2,500 रुपये की किस्त सीधे ट्रांसफर की। सरकार के मुताबिक, योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना और उन्हें अपने छोटे-बड़े खर्चों के लिए वित्तीय सहारा देना है।
51 लाख महिलाओं के खाते में पहुंची सम्मान राशि
मंईयां सम्मान योजना के तहत लाभुक महिलाओं को 2,500 रुपये की राशि दी गई है। महिला एवं बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग का प्रभार मुख्यमंत्री के पास होने के कारण सरकार योजना के नियमित क्रियान्वयन पर विशेष जोर दे रही है।
चुनावी वादे से बनी प्रमुख कल्याणकारी योजना
वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया था। सरकार बनने के बाद मंईयां सम्मान योजना को लागू किया गया। सरकार का दावा है कि नियमित आर्थिक सहायता से बड़ी संख्या में महिलाओं को घरेलू जरूरतों और व्यक्तिगत खर्चों में मदद मिल रही है।
खनिज कानून को लेकर केंद्र से टकराव
दूसरी ओर, केंद्र के नए खान-खनिज कानून को लेकर राज्य सरकार ने विरोध का रुख अपनाया है। सरकार को आशंका है कि नए प्रावधानों से राज्य के खनिज राजस्व पर असर पड़ सकता है, जिससे मंईयां सम्मान और अबुआ आवास जैसी योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव बढ़ेगा।
इसके बावजूद सरकार का कहना है कि जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। एक तरफ राज्य अपने खनिज अधिकारों को लेकर केंद्र के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस रुख से साफ है कि सरकार खनिज राजस्व से जुड़े विवाद के बीच भी सामाजिक सुरक्षा और महिला कल्याण की योजनाओं को अपनी प्राथमिकताओं में बनाए रखना चाहती है।