नई दिल्ली: NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक के खिलाफ देशभर में जारी छात्र आंदोलनों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप किया है। अदालत ने साफ कहा कि लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाना और शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली, बिहार समेत सात राज्यों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा। अदालत ने कहा कि विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए की गई किसी भी अवैध कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नाबालिगों को तुरंत छोड़ने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले उन नाबालिग छात्रों को राहत दी, जिन्हें प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। अदालत ने आदेश दिया कि सभी नाबालिगों को तत्काल रिहा किया जाए और उनके अधिकारों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
गिरफ्तार छात्रों को भी मिली राहत
कोर्ट ने कहा कि जिन छात्रों पर कोई गंभीर आपराधिक आरोप नहीं है और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें भी रिहा किया जाए। अदालत ने माना कि सिर्फ आंदोलन में शामिल होने के कारण किसी छात्र के भविष्य पर दाग नहीं लगना चाहिए।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ऐसे आरोप रखे गए कि कई जगहों पर छात्रों, महिलाओं, वकीलों और पत्रकारों के साथ कठोर व्यवहार किया गया और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग हुआ। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
साक्ष्य मिटाने की कोशिश न हो, कोर्ट का सख्त निर्देश
अदालत ने सभी राज्यों और एजेंसियों को निर्देश दिया कि आंदोलन से जुड़े CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो, वायरलेस रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी होने तक कोई भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।
केंद्र ने कहा- कुछ जगहों पर हिंसा भी हुई
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कई स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्व भी सक्रिय थे और पुलिसकर्मियों पर हमले की घटनाएं हुई थीं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसी भी निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग करेगी।
अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है। माना जा रहा है कि आने वाली सुनवाई में अदालत पुलिस कार्रवाई की जांच और जवाबदेही को लेकर और कड़े निर्देश दे सकती है।