क्लस्टर व्यवस्था के विरोध में छात्रों का उबाल, डोरंडा कॉलेज के बाहर सड़क जाम कर किया प्रदर्शन

Mahak Kumari
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Ranchi: राजधानी रांची में प्रस्तावित क्लस्टर व्यवस्था को लेकर छात्रों का विरोध अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र डोरंडा कॉलेज के बाहर जुटे और सड़क जाम कर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी छात्रों ने क्लस्टर व्यवस्था को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

छात्रों का आरोप है कि नई व्यवस्था के तहत डोरंडा कॉलेज को केवल साइंस डिपार्टमेंट तक सीमित करने की तैयारी की जा रही है। छात्रों ने कहा कि यह कॉलेज केवल विज्ञान विषयों के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि यहां आर्ट्स, कॉमर्स समेत कई अन्य कोर्सों की पढ़ाई भी होती है। ऐसे में किसी एक विषय तक कॉलेज को सीमित करना हजारों छात्रों के हितों के खिलाफ होगा।

दूर-दराज से आने वाले छात्रों की बढ़ेगी परेशानी

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि डोरंडा कॉलेज में रांची समेत आसपास के कई जिलों और दूर-दराज ग्रामीण इलाकों से छात्र पढ़ने आते हैं। अगर क्लस्टर व्यवस्था लागू हुई और कॉलेजों को विषयवार सीमित किया गया, तो छात्रों को दूसरे कॉलेजों में शिफ्ट होना पड़ेगा, जिससे आर्थिक और शैक्षणिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ेंगी।

“क्लस्टर सिस्टम पर नहीं है कोई पारदर्शिता”

छात्रों ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अब तक न तो छात्रों को इस व्यवस्था की स्पष्ट जानकारी दी गई है और न ही शिक्षकों को बताया गया है कि क्लस्टर सिस्टम किस तरह काम करेगा। इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और चिंता का माहौल बना हुआ है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शनकारी छात्रों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने क्लस्टर व्यवस्था को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। छात्रों ने कहा कि आने वाले दिनों में रांची यूनिवर्सिटी से जुड़े अन्य कॉलेजों में भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

छात्रों का कहना है कि इस व्यवस्था का सबसे ज्यादा असर रांची यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों, खासकर डोरंडा कॉलेज और महिला कॉलेजों पर पड़ेगा, जिससे छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है। छात्रों ने सरकार से मांग की है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।

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