रांची: राजधानी रांची में नाबार्ड की ओर से आयोजित ‘ग्रामीण भारत महोत्सव–क्लासिक एक्सपो 2026’ के छठे संस्करण का शुभारंभ ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने किया। उद्घाटन के बाद मंत्री ने एक्सपो में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का जायजा लिया और बुनकरों, कारीगरों तथा महिला समूहों से उनके उत्पादों की जानकारी ली। एक्सपो में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे बुनकरों, हस्तशिल्पियों और महिला समूहों ने अपने पारंपरिक उत्पाद, हैंडलूम, आर्ट एंड क्राफ्ट समेत कई ग्रामीण उत्पाद प्रदर्शित किए हैं। झारखंड की सिल्क साड़ियों और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े स्टॉल लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

इस मौके पर दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किए बिना समावेशी विकास की कल्पना पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत महोत्सव जैसे आयोजन स्थानीय उत्पादों को बाजार और पहचान दिलाने के साथ-साथ बुनकरों, कारीगरों और महिला समूहों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
मंत्री ने कहा कि एक्सपो में गुणवत्तापूर्ण और जीआई टैग वाले उत्पादों की मौजूदगी से खरीदारों को उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर भरोसा मिलता है। वहीं ग्रामीण उत्पादकों को बड़े बाजार से सीधे जुड़ने और अपने उत्पादों की वास्तविक बाजार कीमत समझने का अवसर मिलता है। इससे भविष्य में वे अपने उत्पादों की कीमत तय करने और बेहतर मोलभाव करने में सक्षम होंगे।
उन्होंने कहा कि खेती के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त साधन विकसित करना भी बेहद जरूरी है। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने में मदद मिलती है।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में तैयार होने वाले कई उत्पाद बड़े शहरों में कई गुना अधिक कीमत पर बिकते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उत्पाद की बिक्री से होने वाले लाभ का उचित हिस्सा उस बुनकर या कारीगर तक भी पहुंचे, जिसकी मेहनत से वह उत्पाद तैयार हुआ है।
उन्होंने एक्सपो को महज प्रदर्शनी नहीं, बल्कि बायर्स–सेलर्स मीट के जरिए ग्रामीण उत्पादकों को बड़े बाजार से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया। मंत्री ने ग्रामीण उद्यमियों के लिए बेहतर क्रेडिट लिंकेज और आसान बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बड़े कारोबारियों की तरह ग्रामीण उद्यमियों, महिला समूहों और कारीगरों को भी पर्याप्त और आसान वित्तीय सहायता की जरूरत है। झारखंड में ग्रामीण विकास विभाग और जेएसएलपीएस के माध्यम से महिला समूहों को प्रशिक्षण, स्वरोजगार, बाजार और वित्तीय अवसरों से जोड़ने का काम लगातार किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि झारखंड के ग्रामीण हुनर, महिलाओं की मेहनत और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाए। इसके लिए बुनकरों, कारीगरों और ग्रामीण महिला समूहों को संगठित कर उन्हें बेहतर बाजार और वित्तीय अवसर उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है।