रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में गिरफ्तार पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को अदालत से राहत नहीं मिली है। रांची स्थित CID की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत के फैसले के बाद फिलहाल उन्हें न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा।
CID ने अदालत में पेश की करीब 1000 पन्नों की केस डायरी
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान CID ने आरोपी को जमानत दिए जाने का विरोध किया। जांच एजेंसी की ओर से अदालत में करीब 1000 पन्नों की केस डायरी पेश की गई, जिसमें मामले से जुड़े साक्ष्यों और आरोपों का उल्लेख किया गया है। CID का कहना है कि मामला गंभीर प्रकृति का है और जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है।
कमीशन लेने के आरोपों का भी किया गया जिक्र
CID ने अदालत को बताया कि एल खियांग्ते पर परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से कथित तौर पर मोटी रकम कमीशन के रूप में लेने के गंभीर आरोप हैं। जांच एजेंसी ने आशंका जताई कि जमानत मिलने की स्थिति में जांच प्रभावित हो सकती है और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना बनी रह सकती है।
24 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार
JPSC परीक्षा अनियमितता को लेकर CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 24 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सभी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
श्वेता गुप्ता और अभय तिवारी भी आरोपी
जांच के दायरे में JPSC में लंबे समय तक कार्यरत रहीं श्वेता गुप्ता और अभय तिवारी समेत कई अन्य लोग भी शामिल हैं। दोनों न्यायिक हिरासत में हैं। जांच में अभय तिवारी और उनके परिवार के कुछ सदस्यों की JPSC की विभिन्न परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को लेकर भी जानकारी सामने आने की बात कही गई है।
अब हाईकोर्ट से उम्मीद
CID की विशेष अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद एल खियांग्ते के पास अब राहत के लिए झारखंड हाईकोर्ट का रुख करने का रास्ता बचा है। फिलहाल उन्हें जेल में ही रहना होगा।