रांची: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार दिलचस्प होता जा रहा है। जहां सत्तारूढ़ गठबंधन ने अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं, वहीं पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवाणी के चुनावी मैदान में उतरने की चर्चाओं ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है।
चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के बीच कई उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र खरीदे जाने से यह संकेत मिल रहा है कि मुकाबला सिर्फ औपचारिक नहीं रहने वाला। परिमल नाथवाणी का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक दलों ने भी अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से विचार शुरू कर दिया है। राज्य की राजनीति और विभिन्न दलों के नेताओं के साथ उनके पुराने संबंधों को देखते हुए उनकी संभावित उम्मीदवारी को अहम माना जा रहा है।
विधानसभा में संख्या बल के आधार पर झामुमो और कांग्रेस ने एक-एक सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। लेकिन यदि कोई तीसरा मजबूत उम्मीदवार मैदान में आता है तो चुनावी गणित के साथ-साथ राजनीतिक प्रबंधन की भी बड़ी परीक्षा होगी। ऐसे में विधायकों की एकजुटता और दलों की रणनीति निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन परिमल नाथवाणी के नाम ने चुनाव को रोचक जरूर बना दिया है। अब सबकी निगाहें नामांकन के अंतिम दिन और आगे की राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हैं। यदि मुकाबला त्रिकोणीय होता है तो राज्यसभा चुनाव में कई अप्रत्याशित समीकरण देखने को मिल सकते हैं।