रामगढ़/नेमरा: झारखंड आंदोलन की पहचान और दिशोम गुरु को समर्पित एक ऐतिहासिक आयोजन सोमवार को उनकी जन्मभूमि नेमरा में देखने को मिला। यहां उनकी 14 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में लोग, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और झारखंड आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुई। प्रतिमा के अनावरण के बाद पूरे परिसर में उत्साह और गौरव का माहौल देखने को मिला। लोगों ने दिशोम गुरु के संघर्षपूर्ण जीवन, झारखंड आंदोलन में उनकी भूमिका और राज्य निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
मौजूद वक्ताओं ने कहा कि दिशोम गुरु ने जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को जनआंदोलन का स्वरूप दिया तथा आदिवासी, मूलवासी और वंचित समाज की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि नेमरा में स्थापित यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता, संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक है। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया। प्रतिमा स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए लोगों का दिनभर तांता लगा रहा। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थल आने वाले समय में झारखंड आंदोलन के इतिहास और दिशोम गुरु के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।