रांची: झारखंड हाई कोर्ट में वनरक्षी नियुक्ति और नोशनल बेनिफिट्स से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। समय पर जवाब दाखिल नहीं करने पर कोर्ट ने वन विभाग पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने साफ कहा कि हर्जाना जमा करने के बाद ही विभाग का पक्ष स्वीकार किया जाएगा। साथ ही सरकार को अंतिम अवसर देते हुए अगली तारीख पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
यह मामला जितेंद्र कुमार समेत अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विज्ञापन संख्या 03/2014 के तहत पूरी चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बावजूद विभाग की गलत मेडिकल रिपोर्ट के कारण उनकी नियुक्ति में देरी हुई। जहां अन्य अभ्यर्थियों ने 2017 में ही योगदान दे दिया, वहीं याचिकाकर्ताओं को 2019 तक इंतजार करना पड़ा।
इस देरी से उन्हें वेतन वृद्धि और वरिष्ठता में करीब दो साल का नुकसान हुआ। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि उनकी सेवा अवधि की गणना 2017 से की जाए और उन्हें बैच के अन्य उम्मीदवारों के बराबर लाभ दिया जाए, ताकि भविष्य में प्रोन्नति के दौरान कोई नुकसान न हो।
मामले की अगली सुनवाई 9 जून को निर्धारित की गई है।