Ranchi: NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर उठे विवाद के बाद देश की राजनीति और शिक्षा जगत में बड़ा भूचाल आ गया है। 3 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक और सेंटर मैनेजमेंट की कई शिकायतें सामने आने के बाद छात्रों ने देशभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इसी पूरे मामले की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। त्यागपत्र में उन्होंने लिखा कि देश के युवाओं का करियर उनके लिए सबसे ऊपर है और वे नहीं चाहते कि कोई छात्र राजनीतिक लड़ाई या कानूनी उलझनों में फंसकर अपना कीमती समय गंवाए।
संदेश में धर्मेंद्र प्रधान द्वारा कही गई प्रमुख बातें:
धर्मेंद्र प्रधान ने पत्र में उल्लेख किया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में धांधली और अनियमितता की शिकायतें सामने आई थीं. भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए. परीक्षा को तुरंत रद्द कर 21 जून को फिर से सुचारू रूप से आयोजित किया गया. भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए अगले वर्ष से NEET-UG की परीक्षा को CBT (Computer-Based Test) मोड में कराने का निर्णय लिया गया है.
परीक्षा माफिया के आगे नहीं झुकेंगे:
उन्होंने कहा कि 20 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी थी. ‘Whole of Government Approach’ के तहत केंद्र, राज्य और जिला प्रशासन के सहयोग से पुनर्परीक्षा पूरी कराई गई और 16 जुलाई को परिणाम घोषित हुए, जिनमें गरीब और मेधावी बच्चों ने सफलता पाई.।मैंने पहले दिन से ही इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी ली और पीछे नहीं हटा. मेरा संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब न हो.
इस्तीफे की मुख्य वजह: राष्ट्रहित और युवाओं की सुरक्षा:
पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में बन रहे माहौल पर चिंता जताई. उन्होंने स्पष्ट किया वे नहीं चाहते कि राष्ट्र-विरोधी ताकतें युवाओं के असंतोष का अनुचित लाभ उठाएं.
विद्यार्थियों का समय विरोध प्रदर्शनों या अदालती चक्करों में बीतने के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर पर केंद्रित होना चाहिए.पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से वे मन से काफी व्यथित थे और यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है.
प्रधानमंत्री और टीम का धन्यवाद:
पत्र के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने PM के नेतृत्व और सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि 40 साल से ज्यादा समय से वे शिक्षा और समाजसेवा से जुड़े हैं। इस दौरान उन्हें देश की सेवा करने का मौका मिला, इसके लिए वे आभारी हैं। उन्होंने मंत्रालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी धन्यवाद कहा जिन्होंने इस मुश्किल समय में साथ दिया। अंत में उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से वे आगे भी ओडिशा, भारत और यहां के युवाओं की भलाई के लिए काम करते रहेंगे, चाहे वे किसी भी पद पर हों।