NEET परीक्षा पर झामुमो का हमला, कहा- शिक्षा व्यवस्था को गर्त में धकेल रही केंद्र सरकार

Mahak Kumari
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रांची: NEET परीक्षा के सफल आयोजन के बावजूद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्रालय पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह गर्त में धकेल दिया गया है और एक परीक्षा के संचालन के लिए भारतीय वायुसेना की मदद लेना केंद्र सरकार की विफलता को दर्शाता है।

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि भारतीय वायुसेना ने अपना दायित्व पूरी निष्ठा के साथ निभाया और परीक्षा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, लेकिन यह शिक्षा मंत्रालय के लिए शर्मनाक स्थिति है कि उसे एक सामान्य परीक्षा के आयोजन के लिए रक्षा मंत्रालय और सेना की सहायता लेनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जिस मंत्रालय से एक परीक्षा भी सही तरीके से संचालित नहीं हो पा रही है, उसे आत्ममंथन करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। शिक्षा का बजट लगातार घटाया जा रहा है और शिक्षा का क्षेत्र निजी संस्थानों के हवाले किया जा रहा है, जहां पढ़ाई अब आम छात्रों की पहुंच से दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा केवल पैसे वालों तक सीमित होती जा रही है।

भट्टाचार्य ने कहा कि सेना का उपयोग सामान्य परिस्थितियों में नहीं बल्कि आपातकालीन स्थितियों में किया जाता है। ऐसे में परीक्षा प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए वायुसेना का इस्तेमाल सरकार की प्रशासनिक अक्षमता को उजागर करता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि यही स्थिति रही तो भविष्य में CUET परीक्षा में NIA, UPSC परीक्षा में ED और अन्य परीक्षाओं में CBI की तैनाती करनी पड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है और सरकार मूल मुद्दों से ध्यान भटकाकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक विवादों में उलझी हुई है। यदि भविष्य में NEET पेपर को लेकर कोई नया विवाद सामने आता है तो सेना जैसी प्रतिष्ठित संस्था पर भी सवाल उठ सकते हैं, जबकि जिम्मेदारी सरकार की होगी।

सुप्रियो भट्टाचार्य ने दावा किया कि मार्च से अब तक NEET से जुड़े तनाव और दबाव के कारण 19 छात्रों ने आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा और शिक्षा मंत्री अब तक अपने पद पर क्यों बने हुए हैं, इसका जवाब देश के छात्रों और अभिभावकों को मिलना चाहिए।

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