Ranchi: झारखंड के विभिन्न जिलों में लंबित लैंड सर्वे को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश एस. एम. सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई।
अदालत ने कहा कि सरकार लगातार समय मांग रही है और हर बार सर्वे कार्य को अंतिम चरण में बताकर टालमटोल कर रही है। कोर्ट ने सवाल किया कि आखिर राज्यभर में लैंड सर्वे का काम कब तक पूरा होगा। खंडपीठ ने यह भी याद दिलाया कि सरकार ने अपने पिछले हलफनामे में छह महीने के भीतर सर्वे कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक न तो काम पूरा हुआ और न ही प्रगति से संबंधित कोई संतोषजनक रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए 16 जुलाई तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि राज्य के अधिकांश जिलों में लैंड सर्वे का कार्य अब भी अधूरा है। अब तक केवल लातेहार और लोहरदगा जिलों में सर्वे पूरा हो सका है। शेष जिलों में सर्वे कार्य को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार आधुनिक तकनीक के उपयोग की बात कहती रही है। इसके तहत एक विशेष टीम ने केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के भूमि सर्वे मॉडल का अध्ययन भी किया था और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी।
हालांकि, रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रगति नहीं दिखने से हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। अब 16 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार को सर्वे कार्य की वास्तविक स्थिति और आगे की कार्ययोजना कोर्ट के सामने रखनी होगी।