Bokaro: झारखंड के बोकारो ट्रेजरी से वेतन मद में करोड़ों रुपए की संदिग्ध निकासी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। एक पुलिस सब इंस्पेक्टर के नाम पर महज 20 महीनों में 3.15 करोड़ रुपए निकाल लिए गए, जिसका खुलासा प्रधान महालेखाकार (पीएजी) की गोपनीय रिपोर्ट में हुआ है।
पीएजी की ओर से वित्त सचिव को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, उपेंद्र सिंह नामक सब इंस्पेक्टर के वेतन खाते से मई 2024 से दिसंबर 2025 के बीच असामान्य भुगतान किए गए। जहां एक सब इंस्पेक्टर का सामान्य वेतन करीब एक लाख रुपए प्रतिमाह होता है, वहीं इस मामले में हर महीने औसतन 15 लाख रुपए से अधिक की निकासी दर्ज की गई है।
हैरान करने वाली बात यह है कि कुल निकासी पर जीपीएफ मद में केवल 61,668 रुपए की कटौती हुई, जबकि आयकर और टीडीएस की कोई कटौती नहीं की गई। इसके अलावा, सिस्टम में संबंधित कर्मी का पे लेवल 7वें वेतन आयोग के लेवल-18 के बराबर दर्शाया गया, जो इस पद के लिए संभव नहीं है।
जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रेजरी के पेरोल प्रोसेसिंग और वैलिडेशन सिस्टम में गंभीर खामियां मौजूद हैं। डेटा विश्लेषण के दौरान यह आशंका जताई गई है कि बोकारो के अलावा अन्य ट्रेजरी में भी डबल पेमेंट या एक ही अवधि का वेतन बार-बार निकाले जाने जैसे मामले हो सकते हैं।
इस बीच, ट्रेजरी ऑफिसर गुलाब चंद्र उरांव ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए जांच जारी होने की बात कही है। वहीं बोकारो एसपी हरविंदर सिंह का कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड में फिलहाल कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है और हालिया ऑडिट में भी सब कुछ सामान्य पाया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि उपेंद्र सिंह नाम का व्यक्ति 2016 में ही रिटायर हो चुका है, जबकि अन्य समान नाम वाले कर्मचारियों के खातों में भी कोई अनियमितता नहीं मिली है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी रकम की निकासी कैसे और किस स्तर पर हुई। शुरुआती जांच में सामने आए सिस्टम फेलियर और कंट्रोल गैप इस मामले को और गंभीर बना रहे हैं। सरकार के लिए यह मामला वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बनता जा रहा है।