रांची: झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। राज्य सरकार की ओर से बनाई गई वर्ष 2025 की नई नियुक्ति नियमावली पर शीर्ष अदालत ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत की टिप्पणी के बाद वर्तमान DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उनकी नियुक्ति रद्द करने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।
छह महीने से कम सेवा अवधि वाला नियम विवादों में
इस पूरे मामले की जड़ झारखंड सरकार की संशोधित DGP चयन एवं नियुक्ति नियमावली, 2025 का वह प्रावधान है, जिसके तहत छह महीने से कम सेवा अवधि शेष रहने पर भी अधिकारी को कार्योत्तर सेवा का लाभ देकर DGP पद के लिए योग्य माना जा सकता है। कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने इस प्रावधान की वैधता पर सवाल उठाते हुए ऐतिहासिक प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि संबंधित नियम शीर्ष अदालत के निर्देशों के विपरीत हो सकता है।
नियम निरस्त हुआ तो DGP की नियुक्ति पर भी पड़ेगा असर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि विवादित प्रावधान को निरस्त किया जाता है, तो इसके आधार पर हुई नियुक्ति पर भी असर पड़ सकता है। इस स्थिति में झारखंड की वर्तमान DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इस स्तर पर इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अदालत को नियमावली की वैधता पर आगे विचार करना है और संबंधित पक्षों की दलीलें सुननी हैं।
तदाशा मिश्रा को नोटिस, अपना पक्ष रखने का अवसर
सुप्रीम कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत तदाशा मिश्रा को अपना पक्ष रखने का मौका देने का निर्देश दिया है। झारखंड सरकार को उन्हें नोटिस तामील कराने को कहा गया है, ताकि वह इस मामले में अदालत के समक्ष अपना पक्ष रख सकें।
राज्य सरकार के पास नियमों पर पुनर्विचार का विकल्प
शीर्ष अदालत ने झारखंड सरकार को विवादित नियमावली पर पुनर्विचार करने या जवाबी हलफनामा दाखिल करने की स्वतंत्रता दी है। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन को न्याय मित्र (अमिकस क्यूरी) के रूप में नियमों की वैधता की जांच करने का अनुरोध किया गया है। इस प्रक्रिया में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भी सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी। इस दौरान नियमावली की वैधता और DGP नियुक्ति से जुड़े विवाद पर आगे की सुनवाई होने की उम्मीद है। फिलहाल सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर हैं, क्योंकि इस मामले का असर झारखंड में पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया पर पड़ सकता है।