रांची: रिम्स की बहुमूल्य जमीन पर कथित फर्जीवाड़ा कर अवैध निर्माण कराने के मामले में आरोपी बिल्डर शुभम साबू को अदालत से बड़ा झटका लगा है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के विशेष न्यायाधीश ओंकार नाथ चौधरी की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन कब्जाने का आरोप
शुभम साबू, लकी कंस्ट्रक्शन के प्रबंध निदेशक (MD) हैं। ACB ने उन्हें रिम्स की जमीन पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा कर निर्माण कार्य कराने और उसकी खरीद-बिक्री करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार विवादित जमीन पर करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से अपार्टमेंट का निर्माण कराया गया और फ्लैटों की बिक्री भी की गई।
हाईकोर्ट के निर्देश पर चल रही जांच
इस मामले की जांच झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर ACB कर रही है। जांच में अब तक सामने आया है कि जालसाजों ने फर्जी वंशावली, जाली कागजात और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रिम्स की बहुमूल्य जमीन की खरीद-बिक्री की।
9.65 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का खेल
जांच के मुताबिक मोरहाबादी मौजा की करीब 8 एकड़ और कोकर मौजा की 1.65 एकड़ जमीन, यानी कुल 9.65 एकड़ भूमि को अवैध तरीके से बेचने और कब्जाने की साजिश रची गई। आरोप है कि इस जमीन पर कब्जा कर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य कराया गया।
बिल्डर-दलाल-अधिकारियों के नेटवर्क की जांच
ACB की जांच में संकेत मिले हैं कि पूरे मामले में जमीन दलालों, बिल्डरों और कुछ अधिकारियों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था। आरोप है कि इस नेटवर्क ने मिलकर करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर कब्जा किया, बहुमंजिला अपार्टमेंट बनाए और उससे भारी आर्थिक लाभ अर्जित किया।
जांच जारी, कई और खुलासों की संभावना
फिलहाल ACB पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। एजेंसी इस कथित जमीन घोटाले में शामिल सभी लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।